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सोमवार, 12 मई 2025

व्यथा

हम राजा हैं,
जिसमें एक व्यथा भी है।
जो दिखता है,
उसके पीछे एक कथा भी है।
हलवा राजा की हलक में,
काट रहा है।
पूरा देश,
राजा की खोपड़ी चाट रहा है।
भगत सिंह फॉंसी पर,
गॉंधी नोटों पर चढ़े।
वर्तमान के स्तम्भ,
इतिहास पर खड़े।
राजा का छप्पन है,
गॉंधी का छत्तीस रहा होगा।
गॉंधी की क्या लाचारी होगी,
हृदय में कितना खून बहा होगा।
राजा,
इसे सीजफायर के निर्णय के आलोक में देख रहा है।
जन,
इसे सिन्दूर की लाली के शोक में देख रहा है।

रविवार, 21 मई 2023

मेरा सफर

अगस्त ९८
यूँ ही नहीं हो जायेगा,
मेरे सफ़र का खात्मा।
मैं कोई चिराग नहीं जो बुझा तो अँधेरा हो जायेगा।
मैं कोई तूफान नहीं जो अपने साथ सब कुछ समेट ले जायेगा।
मैं बाढ़ नहीं जो अपने साथ महाविनाश लायेगा।
मैं शूल नहीं जो चुभेगा और याद आयेगा।
मैं फूल भी नहीं हूँ जू डाल से मिट्टी में गिरेगा,
और मिट जायेगा।
मैं आग भी नहीं हूँ, जो फैल गयी तो सब राख में बदल जायेगा।
मैं मोम भी नहीं हूँ, जो आँच पाकर पिघल जायेगा।
मैं वो खुशबू हूँ जो चारों तरफ फैल जायेगी, नासिका के रास्ते मस्तिष्क में ठहर जायेगी।
जब कभी याद आयेगी तो बहुत याद आयेगी।
यूँ ही नहीं हो जायेगा,
मेरे सफ़र का खात्मा।
मैं वो नहीं जो मंजिल पाकर ठहर जायेगा।
मैं वो हूँ जो बहुत आगे बहुत आगे बहुत आगे जायेगा।



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रविवार, 18 सितंबर 2022

सम्मान

सम्मान ओढेंगे या बिछायेंगे,
कमरे की दीवार पर सजायेंगे।
खूँटी पर टाँग लेना है या,
हुक्के में भर गुड़गुड़ायेंगे।
बतायें तो सही पाँच हजार में,
कैसा साहित्यिक सम्मान चाहेंगे।
आपके खास आर्डर पर वैसा ही,
सम्मान फैक्ट्री में तैयार करवायेंगे।
आप चाहें तो रेडीमेड भी मिलेगा,
कुछ खर्च भी कम लगेगा
किन्तु शर्त है 
मंच से उतरने के वापस लिया जाएगा,
और दो घंटे बाद 
किसी और को दिया जाएगा।
😀😀😀😀
अपने एक कवि मित्र की सम्मान के लिए डिमांड पर सम्मान सहित अ-कविता
विमल 9198907871

रविवार, 4 अप्रैल 2021

भेड़ और भेड़िया

लहू तो लाल ही है भेड़ का भी भेड़ियों का भी।
पत्ते हरे होते हैं नीम के और हरा होता है अंगूर भी।
कलर नहीं फितरत की बात करो।
खयाल छोड़ो हकीकत की बात करो।
मुझे यह मत बताओ कि पानी तो पानी है,
मुझे यह बताओ कि पानी की क्या कहानी है।
जमीन से निकलता है पेट्रोल किन्तु पी नहीं सकते।
इसी तरह सदभाव की कविता अच्छी है, 
मगर इस कविता को जी नहीं सकते।
ये सनातनी जिस कुएँ से पीते हैं वहाँ,
गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और नर्मदा का,
जल नहीं अमृत बहता है।
तुम तुलना करते हो उन दिलों से जिनमें,
सहारा का रेगिस्तान रहता है।
तुम पढ़लिख ज्यादा गए हो देखते हो फैट 
किन्तु हम देखते हैं कि डालडा है या देशी है।
दकियानूसी है कि नवोन्मेषी है।
दूध से बनी है रबड़ी और दही भी दूध से बनता है,
सबके अपने टेस्ट हैं कोई किसी की कहाँ सुनता है।
खट्टा होता है दही और नींबू भी खट्टा होता है,
मगर रायते में दही का ही जलवा है।
तो ज्यादा रायता मत फैलाओ, 
असलियत पर आओ।
असलियत ये है भेड़ भेड़ है,
और भेड़िया भेड़िया।

गुरुवार, 18 जून 2020

युद्ध-युद्ध

चलो युद्ध युद्ध खेल लेते हैं,
तुम हमें धकेल लो,
हम तुम्हें धकेल लेते हैं।
तनाव अच्छी चीज है,
तनाव का व्यापार करें।
तुम हमसे गुड़ ले लो,  
हम तेल लेने पर विचार करें।
घावों का होना फायदेमन्द है,
अपने अपने कुरेद लेते हैं।
जो दिमाग एकजुट हो रहे हों,
उन्हें हम भेद लेते हैं।
बड़े मियाँ तो बड़े भले, 
छोटे मियाँ पीछे चले।
ककड़ी तो कटी नहीं, 
तलवार से मिले गले।
भाई से खटर पटर जन्मजात,
जब चाहें उखाड़ दें तम्बू कनात।
पर विदेशी उल्लुओं का क्या करें,
घूँसा जड़ें मुँह पे या घींच पर धरें लात।

सोमवार, 3 जून 2019

प्रेम

एक अनकही अकविता

प्रेम,
बात ही न करो,
कभी किया नहीं।
हृदय की संसद,
सत्र दर सत्र,
बजट पास हुआ नहीं।
हताश हुआ नहीं।
प्रेम,
आज भी,
जेहन में है।
जमीन से,
दूर बहुत दूर।
प्रेम,
शिखर से उतरा,
खोह में विलीन हुआ।
मैं और रेगिस्तान,
अपनी जगह पर हैं।
प्रेम,
अब स्वप्न है,
जागूँगा,
टूट जायेगा।

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बुधवार, 15 मई 2019

प्रेम और चुनाव

चुनाव और प्रेम में भी अजीब घालमेल है,
सिर्फ शब्दों, इशारों व भावनाओं का तालमेल है।
वहाँ भी चुनाव था,
यहाँ भी चुनाव है,
वहाँ न कुछ प्रभाव था,
यहाँ न कुछ प्रभाव है,
दिल खोलकर सब कह दिया,
तब भी न कुछ दुराव था,
अब भी न कुछ दुराव है।।

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सोमवार, 13 मई 2019

फेंकू

बादलों का ये फायदा भी?
कि प्रेमिका से मिलने पाकिस्तान चले जाओ,
कोई देखेगा नहीं,
वैसे कभी कभी फेंकू होना भी बुरा नहीं।

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रविवार, 28 अप्रैल 2019

अनचाहे


चाहता हूँ कि
प्रेम न करूँ उसे।
समस्या अनेक,
उम्र, जाति, धर्म,
व्यवसाय, रँग-रूप,
धन-दौलत
और भी बहुत कुछ।
असामान्य असाधारण,
किन्तु चाहने से क्या?
कोई जोर नहीं,
जो होना था हो गया।
अनचाहे मैं कहीं खो गया।

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सोमवार, 29 अक्टूबर 2018

मीठा खट्टा

एक मच्छर दूसरा तिलचट्टा है,
एक सिल है तो दूसरा बट्टा है,
थोड़ी खटर पटर ही सही,
प्रेम में लुनाई न सही
थोड़ा मीठा है थोड़ा खट्टा है।।1।।

तुम अनार का जूस पीती रहो,
और हथिनी सा जीती रहो,
चिन्ता ये नहीं कि तू ज्यादा जी जायेगी,
चिन्ता ये है उठायी कैसे जायेगी।।2।।

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गुरुवार, 22 मार्च 2018

डाटा

1- जब मैंने पहली बार अपनी कनपटी पर,
सफेद बाल देखा। 
तो भूल गया सुषमा, सुशीला, सुरेखा।
वक्त का मैसेज ज्यों गाल पर चाँटा,
यू हैव यूज्ड फिफ्टी परसेंट ऑफ योर डाटा।

2-  चलो थोड़ा सा ही सही भ्रष्ट हो लें,
बनाकर पार्टी सन्तुष्ट होलें|
न्यायालय कहाँ रोकता है तुम्हें,
राजनीति में उत्कृष्ट हो लें|

बुधवार, 28 फ़रवरी 2018

होली खेल जाये

काश मय के साथ,
पैमाना नाच उठे,
और उड़ेल दे चारों ओर,
बसंत की मादकता,
और भुला दे कि आप,
कुछ और नहीं इसी फागुनी पवन के,
अंश हैं|
अर्धांगिनी,
मोहिनी नजर आये,
वो जिसने,
वैलेंटाइन पर उपहार,
न स्वीकारा हो,
आपके साथ होली खेल जाये|
ऐसी विमल भावना के साथ विमल की विमल शुभकामनाएँ जिनमें आप अपनी इच्छा से कोई भी रंग मिलाने के लिए स्वतंत्र हों|



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मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

हम सब कवि हैं



हम सब कवि हैं। 
अपने रोजमर्रा के जीवन में
हम कई बार कविता में ही बतियाते हैं। 
सवेरे सवेरे पति पत्नी 
किस तरह कविता में ही बात करते हैं 
उसका एक नमूना देखें।
तौलिया कहाँ है?  
अरे! वहीं तो टंगा है, 
अलगनी पर देखते नहीं हो।
अ हाँ मिल गया और जूते
जूते! कितनी बार कहा है
अलमारी में। 
ठीक से सहेजते नहीं हो।
हूँ! तुम भी कितनी जल्दी तुनक जाती हो?  
क्यों? पूरे घर का ठेका ले रखा है।
तो इसमें मैं क्या करूं?   
अरे मैं पूरे घर में झाडू लगाती हूँ, तुम कूड़ा तक नहीं फेंकते हो।
 



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सोमवार, 27 नवंबर 2017

गरमई


आप अंगीठी नहीं है,
आपकी देह की गरमई,
उस रजाई का कमाल है,
जिसमें लिपटे रहे हो रात भर।
और जिसे मैंने तुम्हारे,
ऊपर से  नीचे तक,
दबाये रक्खा है,
रातों में जागकर।

शनिवार, 25 नवंबर 2017

खुशफहमी

चलो खुशफहमी का ढोल बजाते हैं।
पहली दिसम्बर अभी दूर है,
मेरे सपनों में वोट गिने जाते हैं,
हम बिना लड़े ही चेयर पर हैं
और चेयरमैन हुये जाते हैं।

यहाँ पहली दिसम्बर से मतलब कोई भी तिथि जिस पर मतगणना होनी है और लोग जिसकी प्रतीक्षा में हैं|

सोमवार, 23 अक्टूबर 2017

न मिली

कभी मकां बदला, कभी दुकां बदली।
जिस गली में वो था वही गली न मिली।
तुम भी मेरी जमात के लगते हो प्यारे।
कभी खोपड़ी न हिली कभी कमर न हिली।।

बुधवार, 21 जून 2017

खोटा ही सही

कभी आओ कभी बुला लो मुझको।
खोटा ही सही चला लो मुझको।
सोना है जान जेवरों की माना,
टाँके की तरह मिला लो मुझको।।
کبھی آو کبھی بُلا لو مُجھکو۔
کھوٹا ہی سہی چلا لو مُجھکو۔
سونا ہَے جان زیوروں کی مانا۔
ٹاںکے کی ترہ ملا لو مُجھکو۔                       

बुधवार, 8 मार्च 2017

मदहोश कर दे

होश वाला हूँ जरा बेहोश कर दे|
भाँग घोटे ही बिना खरगोश कर दे|
फागुनी मौसम चहकता रात दिन है,
फिर कोई तनहा छुए मदहोश कर दे|

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

सब ठीक है

नोट बंद हैं बड़े बड़े। सब ठीक है।
लोग थके हैं खड़े खड़े। सब ठीक है।
बैंक में करेंसी कम है। सब ठीक है।
पब्लिक भले बेदम है। सब ठीक है।
ब्लैक वाइट हो गया। सब ठीक है।
कश्मीर टाइट हो गया।सब ठीक है।
नोट असली आ गये। सब ठीक है।
और नकली छा गये। सब ठीक है।
फिफ्टी डेज कष्ट है। सब ठीक है।
हमें उस पर ट्रस्ट है। सब ठीक है।

सोमवार, 5 सितंबर 2016

फेसबुक 4



ये मेरी अत्यधिक छोटी छोटी कवितायेँ वे हैं जो मैंने जब तब फेसबुक पर व्यक्त कीं हैं|
10
17/01/2015
आओ अलाव जलायें।
रिश्तों की बर्फ पिघलायें।
सर्द मौसम है सर्द हैं हवाएं।
हम मुश्किलों को उनकी औकात समझाएं।
11
17/03/2015
मेरी भूख, तुम्हारी प्यास।
आओ मेंटें, मिलकर त्रास।
मेरा दिन ' तेरी रात।
सदा चलेगी इतनी बात।
12
18/03/2015
सजन तुम्हारा रूठना, फिर मेरी मनुहार।
मेरे तेरे बीच में इतना ही संसार।
तुम्हारे गुलाबी गाल पर ये kiss का कैसा निशान है।
एक होंठ मेरा और एक होंठ तेरा है।

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