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शनिवार, 5 अक्टूबर 2013

चाची जी से सीख लिया

जब वह घर आते हैं तो बच्चों के लिए जशन का माहौल होता है वजह ये कि वह आये हैं तो उनके खाने पीने खेलने आदि का कुछ सामान भी लाये होंगे।
पिछली बार जब वह घर आये थे बच्चों के लिए कपड़े और मिठाइयों के साथ ढेर सारे खिलौने भी लाये थे। आज भी उनके घर आने की खबर सुनकर बच्चे सुबह से ही उनके इंतजार में पलक पांवड़े बिछाए बैठे थे, जैसे ही टैक्सी दरवाजे पर रुकी बच्चों ने लपककर उनका सूटकेश अपने छोटे छोटे हाथों से संभाला और घसीट कर उसे ड्राइंग रूम तक ले गये लेकिन यह क्या सूटकेश में ताला लगा हुआ था। पहले तो ऐसा कभी नहीं हुआ। सब बच्चे धीरे धीरे वहाँ से खिसक लिए। किन्तु नन्हीं सी टीना ने पूंछ ही लिया चाचा जी सूटकेश में ताला डालना क्या नई नई चाची जी से सीख लिया।

बुधवार, 30 नवंबर 2011

झूठ बोलना


कक्षा के सामने से गुजरते हुए प्रधानाचार्य जी की नजर जब शोर मचाते हुए बच्चों पर पड़ी तो उन्होंने डपट कर पूछा, "किसका पीरियड है? "स...सर! अंग्रेजी का," बच्चों ने सहमकर उत्तर दिया। "कौन पड़ाता है?" "सर! मिश्रा जी सर!" प्रधानाचार्य जी ने मिश्रा जी को बुलवाया और बच्चों को पढ़ाने के लिये कहकर चले गये।
मिश्रा जी ने बच्चों को डाँटा "बड़े गधे हो, अपने अध्यापक के सम्मान में इतना ही कह देते कि पीरियड खाली है। कम से कम मेरी डाँट तो नहीं पडती बड़े हरिश्चन्द्र बने फिरते हो। उन्हीं मे से एक बच्चा अपने घर आया और उसकी माँ ने पूँछा,"बेटे आज स्कूल मे क्या सिखाया गया?" "बच्चे ने मासूमियत से जवाब दिया, "माँ झूठ बोलना।"

हमारीवाणी

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