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शनिवार, 23 दिसंबर 2017

एक प्रदर्शनी



23/12/2017 पिहानी- स्थान सेंट जेवियर्स सीनियर सेकंड्री स्कूल|
मुझे अपने सहायक अध्यापक श्री बृजेश कुमार के साथ यहाँ जाने का अवसर प्राप्त हुआ| यहाँ एक बाल प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था| विभिन्न विषयों पर आधारित मॉडल बच्चों द्वारा प्रदर्शित किये गये थे जो उनकी कल्पनाशीलता, अध्ययनशीलता व श्रमशीलता के प्रमाण थे| वाकई मन मोह लिया प्रदर्शनी ने| यहाँ नर्सरी से कक्षा 12 तक के बालक-बालिकाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था| इतिहास, भूगोल, पर्यावरण, उद्योग, विज्ञान, गणित, हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी व कम्प्यूटर-संचार आदि अनेकानेक विषय| प्रतीत हुआ कि किसी काल्पनिक संसार के भ्रमण पर हूँ| प्रत्येक मॉडल के पास खड़े हुए बाल प्रदर्शक (demonstrater) जिस तरह से अपने मॉडल को व्याख्यायित कर रहे थे वह प्रशंसनीय था| ऐसे आयोजन विद्यालय के छात्रों ने क्या पढ़ा सिर्फ यही प्रदर्शित नहीं करते अपितु क्या सीखा इसे प्रदर्शित करते हैं| कुछ मॉडलों के चित्र मैंने अपने कैमरे में कैद करने का प्रयास किया है, इसे अपने ब्लॉग पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ| आप सब भी देखें|

शहर


कम्प्यूटर


क्राफ्ट


फिगर्स ऑफ़ स्पीच


फारेस्ट लाइफ


अस्पताल


वन्य जीवन


तितली का जीवन


संगीत


संगीतकार


विलोम


पालतू पशु


चन्द्रमा की कलाएँ

प्रेजेंट टेंस


पुली


लाल किला


क्रियाएं व चिन्ह 


कंकाल


सौर मण्डल


ताजमहल






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बुधवार, 20 दिसंबर 2017

शीतकालीन अवकाश

अब आज और कल  (20/12/2017 & 21/12/2017)  इतनी भी ठण्ड नहीं थी कि छुट्टी घोषित कर दी जाये| मुझे तो यह समझ में नहीं आता कि पर्वतीय प्रदेशों में कभी स्कूल खुलते भी होंगे जहाँ रोज ही इतनी ठण्ड होती है| जब मैं स्कूल में पढ़ता था तब शीतकालीन अवकाश इतने बड़े पैमाने पर घोषित नहीं किये जाते थे| तब शायद शीत भी अब से ज्यादा होती थी| तो अब ऐसा क्या हो गया कि जरा सा छींक आने पर स्कूल बंद कर दो| आपको पता हो इसका सबसे बड़ा नुकसान देहात क्षेत्र के बच्चों को होता है| जिनके लिए न तो घर पर ट्युशन ही उपलब्ध होती है न माँ बाप ही इतने पढ़े लिखे होते हैं कि वे बच्चों को खुद पढ़ा सकें| समझना होगा देहात क्षेत्र में अवकाश का मतलब बस्ता बंद| तो ऐसे में छुट्टियों का निर्णय सोंच विचार कर लिया जाना चाहिए| वैसे भी छुट्टी घोषित कर दो तो बच्चे घरों में कैद होकर नहीं रह सकते वे तो उधम मचाते गलियों में ही अच्छे लगते हैं उन्हें कोई रोक नहीं सकता| यह छुट्टी सिर्फ कामचोरों के लाभ की हो सकती है| कुल मिलाकर बालकों का हानि पहुंचायेगी| छुट्टी तभी होनी चाहिये जब वास्तव में उसकी आवश्यकता हो|


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बुधवार, 6 नवंबर 2013

कैसी डॉक्टर हैं?

डॉ0 नाम सुनते ही जहन में दूसरे भगवान का रूप कौंधता है। मगर बड़ी निराशा हुई आज का समाचार पढ़ कर की सांसद धनंजय सिंह की पत्नी जागृति सिंह जो कि पेशे से डॉक्टर हैं उनहोंने नौकरानी को पीट पीट कर मार डाला। इतना ही नहीं यह भी सुनने में आया है कि वह अपने नौकरों से प्रायः ऐसा दरिंदगी पूर्ण कार्य व्यवहार करती रहतीं थीं। थू है ऐसी नारी पर। नारी को पहले ही देवी कहा जाता है, ममता की मूर्ति कहा जाता है ऊपर से जब वह डॉक्टर हो तो उससे अतिरिक्त दया भावना की अपेक्षा की जाती है। क्या सोचती हैं जागृति सिंह खुद को एक देवी या चुड़ैल? डॉक्टर का दिल तो तुम्हारे पास नहीं हो सकता।

सोमवार, 9 सितंबर 2013

दुकान चल रही है।

एक लेख पढ़ा लेखक विचार कर रहा था कि तमाम आरोपों के लगने जेल आदि हो जाने के बाद भी निर्मल बाबा और आसाराम बापू जैसे लोगों की दुकाने चल क्यों रही हैं। उनके यहाँ भीड़ और लोगों की आस्था में कमी क्यों नहीं होती।
अरे भाई यह हिंदुस्तान भेड़िया दसान यूँ ही तो नहीं कहा जाता है। यहाँ किसी की दुकान बंद नहीं होती। एक कहावत कही जाती है कसाई के कोसने से गाय तो नहीं मरती आपके सोंचने से दुकान भी बंद नहीं हो सकती। यहाँ दुकानें चल रही हैं जेल से आने के बाद भी साधू संतों की। किसी को ताज्जुब क्यों है? यहाँ जेल के अंदर दुकानें चल रही हैं गुंडे, मवाली, माफियाओं, नेताओं, चोरों, तस्करों, पुलिसवालों की। सभी के समर्थक मौजूद हैं समाज में।जितना बड़ा अपराधी उतनी बड़ी दुकान उतनी ज्यादा भीड़ धर्म हो या राजनीति आज के भारत का यही सच है।

लोकतन्त्र बनाम चोरतन्त्र

अब्राहम लिंकन ने कहा था "लोकतन्त्र जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा शासन है।"
काश वह जीवित होते और भारत की वर्तमान मनमोहन सिंह सरकार को देखते तो यही कहते लोकतन्त्र चोरों की ,चोरों के लिए, चोरों के द्वारा सरकार है।
मुझे ताज्जुब नहीं होता की किस तरह से घोटाले दर घोटाले होते हैं, अर्थव्यवस्था लडखडाती है, पड़ोसी आँख दिखाते हैं, संसद हंगामे की भेंट चढ़ जाती है और सरकार कामचलाऊ रवैया अपनाते हुए जैसे दीन दुनिया से बेपरवाह अपना टाइम पास करती जा रही है। यह देखकर बड़ी निराशा होती है कि दागियों को संसद में बनाये रखने और उन्हें संसद में अधिक संख्या में पहुँचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पलटने के लिए पक्ष और विपक्ष सभी एकजुट हो जाते हैं। न तो विधेयक लाकर सदन में पास होने में देर लगती है और न अध्यादेश जरी करने में किन्तु यदि लोकहित का कोई मामला आ पड़े तो बड़ी हीला-हवाली होती है। आज भी संसद में अनेक विधेयक चर्चा और पास होने का इंतजार कर रहे हैं। 
यह सब देखकर तो यही लगता है की सत्ता हो विपक्ष चोरों की मौज है।

शनिवार, 11 मई 2013

बड़े बे आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले

ससुरे पहले इस्तीफा दे देते तो कुछ सम्मान तो बचा रहता लेकिन क्या करें ये भी बेहयाई घुट्टी में पी रखी है जी हाँ मैं अपने कानून मंत्री और रेल मंत्री की ही बात कर रहा हूँ। ये खुले आम दोषी सिद्ध हो जाने पर भी आखिरी क्षण तक कुर्सी से चिपके रहे। लगता नहीं ये वही कांग्रेस पार्टी है जो देश की आजादी के लिए लड़ी। आज अपने नेताओं के भ्रष्टा चार के बोझ तले दबी जा रही है।

मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

अब गनीमत है


आज विज्ञापन में पढ़ा कि अब टी ई टी अभ्यर्थियों को किसी भी जिले से आवेदन करने की अनुमति है और उन्हें केवल एक जिले से बैंक ड्राफ़्ट लगाना होगा शेष जिलों के लिय़े उन्हें ड्राफ़्ट की फोटोकापी लगानी होगी यह अभ्यर्थियों के लिये बहुत बड़ी राहत है इस राहत के जिम्मेदारों को धन्यवाद। किन्तु अभी कसर है होना यह चाहिये था कि अभ्यर्थियों से आवेदन भी एक ही माँगा जाता प्रदेश स्तर पर और उन्हें डाक खर्च में भी राहत प्राप्त हो जाती। अगर ऐसा हो जाये तो सोने मेम सुहागा हो जायेगा।

शनिवार, 26 नवंबर 2011

टी ई टी की नौटंकी


उत्तर प्रदेश में टी ई टी के रिजल्ट घोषित हो गये हैं और सरकार एक बार फिर बेरोजगारों से मजाक करने के मूड में है खबर है कि एक दो दिन में विज्ञापन जारी किये जायेंगे फिर आवेदन माँगकर अध्यापकों की भर्ती की जायेगी एक आवेदक ३ जिलों से आवेदन कर सकता है। मेरी समझ में यह नहीं आता कि आखिर छल करने के लिये सरकार को बेरोजगार ही मिले थे।अव्वल तो एक विद्यार्थी जिसने ग्रेजुएट की परीक्षा पास करके बी एड या बी टी सी की एन्ट्रेन्स परीक्षा पास करके उसने बाकायदा ट्रेनिंग ली है फिर अध्यापक होने की योग्यता उसने हासिल की है। उसका टी ई टी के नाम पर एक और इम्तहान ही गलत है। दर असल टी ई टी की परीक्षा भारत की सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था पर एक ऐसा करारा तमाचा है जो हमारे देश के अकल के अन्धे नीति निर्धारकों को महसूस नहीं होता।
सरकार के द्वारा इस परीक्षा का आयोजन यह बताता है कि हमारे देश के नीति नियन्ता एक ऐसी शिक्षा व परीक्षा व्यवस्था देने में नाकामयाब रहे हैं जिसमें से होकर अच्छे स्टूडेन्ट बाहर निकलें ताकि बार बार उनकी परीक्षा की आवश्यकता ही न रहे तथा संस्थानों के द्वारा जारी सर्टीफिकेटों पर विश्वास किया जा सके।

वास्तव में शिक्षा व्यवस्था इस कदर चरमरा गई है कि आज बिना एक भी दिन स्कूल में जाये हुए भारत खासकर यू पी में कोई भी डिग्री हासिल की जा सकती है। ऐसे में क्या गारंटी है कि इस परीक्षा के बाद अच्छे अध्यापक विद्यालयों को हासिल होंगे। वास्तव में सरकार बेरोजगारों से कमाई करने में लगी है आवेदन फार्म भरवाने के नाम पर। जितनी ज्यादा बार आवेदन फार्म भरे जायेंगे उतनी बार आवेदकों से शुल्क वसूला जायेगा।

अच्छा होगा कि एक ऐसी ईमानदार शिक्षा परीक्षा प्रणाली विकसित की जाये जिससे अच्छे विद्यार्थी बाहर निकलें जिनकी अंकतालिकाओं पर विश्वास किया जा सके और उन्हें बार बार परीक्षाओं से न गुजरना पड़े। फिलहाल टी ई टी के बारें में इतना चाहूँगा कि अब जो पास हो गये हैं उनसे कोई आवेदन न भरवाकर मेरिट के आधार कौंसिलिंग करा ली जाये और क्रम से आवेदकों की च्वाइस पूँछ्कर उन्हें जिले व स्कूल आवंटित कर दिये जायें तो सरकार की बड़ी मेहरबानी होगी।

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

शरद पवार को थप्पड़


कृषि मन्त्री शरद पवार को थप्पड़ मारना लोकतन्त्र में एक निन्दनीय घटना है तथापि हमारे नेताओं को यह सोंचना पड़ेगा कि आखिर ऐसा करने के लिये  के जिम्मेवार कौन है लोकतन्त्र की दुहाई देने वाले तब कहाँ होते हैं जब वे अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना भूल जाते हैं और पब्लिक देखती है कि एक ओर वह त्रस्त है और नेता लोग मौज उड़ाते हैं। 

गुरुवार, 24 नवंबर 2011

पिहानी हरदोई मार्ग


आज दिमाग में आया कि कुछ आस पास के बारे में लिखा जाये सामने नजर उठाकर देखा तो सड़क पर एक बोर्ड लगा था पिहानी हरदोई मार्ग। सड़क पर एक निगाह डाली इसलिये कि कुछ खास नजर आ जाये मगर यह सड़क भी जिले की दूसरी सड़कों की तरह ही टूटी फूटी नजर आई। समझना मुश्किल कि सड़क में गड्ढे या गड्ढों में सड़क। ऐसा तब है जब कि इस जिले में ९ विधान सभा क्षेत्र हैं और सभी पर सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी के विधायक सत्तासीन हैं।
आपको क्या लगता है कि यहाँ के विधायक सो रहें हैं जी नहीं। जो सत्ता के नशे में चूर होते हैं उन्हें यह पता नहीं होता कि किन वायदों के साथ वे सत्ता में पहुँचे।

हमारीवाणी

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