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शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

अहमदनगर



वर्तमान में यह महाराष्ट्र में है| मध्यकाल में यह निजाम शाही सुल्तानों की राजधानी रहा| इस नगर की स्थापना निजामशाही वंश के प्रथम शासक अहमद निजामशाह ने की थी| 1600 ई0 में यह मुगलों के कब्जे में आया| यहाँ की प्रमुख इमारतों में अहमदनगर का किला, बाग़-ए-रोजा, बाग़-ए-बहिरत, कोटला मस्जिद व तोर्रा बीबी मस्जिद प्रमुख है| अहमदनगर के प्रसिद्ध चित्रों में एक चित्र 1591 में बना हिंडोल राग है| 




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मसुलीपट्टम


यह स्थल तमिलनाडु राज्य में कृष्णा नदी के मुहाने पर स्थित बन्दरगाह था| यह 17 वीं सदी में अपने उत्कर्ष पर था| 1611 में ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने यहाँ अपनी फैक्ट्री लगाई थी| 1632 में गोलकुंडा के शासक ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी को व्यापार करने के लिए ‘सुनहला फरमान’ जारी गया| 1686 में डच, 1690 में अंग्रेज, 1750 में फ़्रांस 1750 में ही पुनः अंग्रेजों ने इस पर अधिकार कर लिया| इस बन्दरगाह से सूती वस्त्र, गलीचे एवं धागे का निर्यात किया जाता था|



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गया



यह स्थल बिहार में है| इस स्थल से थोड़ी ही दूर पर बोधगया है| बोधगया में गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था| वर्तमान में भी यह बौद्धधर्म का तीर्थ स्थल है| अपने शासन काल के दसवें वर्ष में अशोक ने यहाँ की यात्रा की थी| 411 में प्रसिद्ध तीर्थयात्री फाहियान ने यहाँ की यात्रा की थी| यहाँ ह्वेनसांग ने अपने कदम रखे| पौराणिक कथाओं के अनुसार गया में गयासुर नामक राक्षस निवास करता था जिसे भगवान विष्णु ने यहाँ से निकाल दिया| यहाँ मगध विश्वविद्यालय भी है| गया फल्गु नदी के किनारे स्थित है जिसे बोधगया में निरंजना कहा जाता है|




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कुम्भलगढ़



यह स्थल एक किला है जो कि राजस्थान के उदयपुर जिले में स्थित एक ऊँची पहाड़ी पर है| ऐसा अनुमान है कि इसका निर्माण जैन राजा सम्प्रति ने तीसरी शताब्दी में कराया था, किन्तु इसका विधिवत निर्माण राणा कुम्भा ने करवाया था| पन्ना धाय ने उदय सिंह की रक्षा के लिए चित्तौड़ से आकर यहीं शरण ली थी| बाद में यहीं से उदय सिंह ने बनबीर को हराकर राजगद्दी प्राप्त की थी| यहाँ कुम्भा स्वामी का मन्दिर स्थित है जो अपने मूर्ति शिल्प के लिए जाना जाता है|




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अजमेर



कर्नल टॉड ने इस नगर को राजपूताने की कुंजी कहा| इस नगर की स्थापना 1113 में शाकम्भरी के चौहान शासक अजयदेव के द्वारा की गयी थी| जब मुहम्मद गोरी ने यहाँ आक्रमण किया तब यहाँ चौहानों का शासन समाप्त हो गया| यहाँ ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है| यहीं पास में ही अजयपाल द्वारा “तारागढ़ का दुर्ग” बनवाया बनवाया गया है| 1102 में यहीं कुतुबुद्दीन ऐबक के द्वारा “अढ़ाई दिन का झोपड़ा” नामक इमारत बनवाई गई| यहाँ जैनियों का रथवाला मन्दिर भी है| 




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बीदर



यह स्थल वर्तमान में हैदराबाद के पास स्थित है| किसी समय बीदर वारंगल राज्य के अंतर्गत था| इस पर गयासुद्दीन के पुत्र जूना खां के द्वारा अधिकार करने पर यह दिल्ली सल्तनत के अधीन आ गया| 1347 में बहमनी सल्तनत की होने पर बीदर उसका अंग बन गया| 1423 में सुल्तान अहमदशाह ने बीदर को अपने साम्राज्य की राजधानी बनाया| 1526 में अली बरीद ने बीदर के बरीदशाही वंश की स्थापना की| मध्यकाल में बीदर दक्षिण भारतीय वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध था| मुहम्मदशाह के प्रधानमन्त्री महमूद गवां द्वारा 1472 में बीदर में एक मदरसा बनवाया गया| 1619 में इसे आदिलशाही शासक इब्राहीम आदिलशाह ने बीजापुर में मिला लिया गया|




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