रविवार, 19 जनवरी 2014

बिको जाति है

गाँव से शहर गओ गोरी के प्रेम पगो,

बीबी का बताई गओ बिजनेस का जाति है।

रोज रोज फोन करि घर मा बताई देइ,

जल्दी लौटि अइबो कुछु सौदा रहो जाति है।

भारत सरकार थी जो शीश कटे चुप्प रही,

औरतन से ज्यादा जेहिकी साख गिरी जाति है।

बीबी रही समझदार एक दिन बोली मियाँ,

जो तुम खरीदति हुआं हियाँ बिको जाति है।

शीत

उठा क्षितिज से कुहरे का दल,

लील गया सूरज का संबल।

लील गया घर खेत बाग वन,

लील गया आंगन का गुंजन।

लहरा बीच रजाई पाला,

मन को कँपा नचा तन डाला।

हड्डी अकड़ लकड़ बन बैठी,

आँतें शीत पकड़ कर ऐंठीं।

कूँ कूँ करते पिल्ली पिल्ला,

बुढ़ऊ कहते जाड़ा चिल्ला।

हमारीवाणी

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