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बुधवार, 17 दिसंबर 2025

रखना

वो चाहेगा तुम्हें पिआसा रखना।
मत किसी से कोई आशा रखना।
मंच तो उसने सजा रक्खे हैं सब,
अपनी ओर से न तमाशा रखना।

रविवार, 27 नवंबर 2022

देवर

घृणा को नैन में भरकर न छवि का ध्यान भी करना।
अगर है प्रेम किंचित भी तो उनका मान भी करना।
कपोलों पर भले पिटने की मेरे नीलिमा होगी,
अनुज! भौजाइयों से डर न तुमको ज्ञान भी रखना।।1।।
चढ़ा सावन सजन परदेश झूला कौन डालेगा?
बसन्ती पवन फागुन बिन देवर के मौन सालेगा।
दिवाली में बड़े भैया अगर घर देर से पहुँचे,
तो ड्योढ़ी पर दिवाली के दियों को कौन बालेगा??2??
हमारे देश में वर से अधिक देवर पियारा है।
निजी घर हो कि हो ससुराल वो सबका दुलारा है।
जहाँ देवर बना है पुत्र भाभी बन गयी है माँ,
कुटी का भार प्रभु ने लखन के कंधों उतारा है।।3।।

गुरुवार, 19 मई 2022

मुबारक

1
तुम्हें हुक्मरानी तुम्हारी मुबारक,
हमें दिन भरे की दिहाड़ी मुबारक,
कहाँ काशी काबा में सिर को घुसेड़ूँ,
नचाए सभी को मदारी मुबारक।
2
सब हवा के साथ बहते जा रहे हैं,
जागरण का ध्वज सभी लहरा रहे हैं,
मैं विवश हूँ देखने को पूर्व दिशि मेंं,
मेघ कुछ उत्पात हित गहरा रहे हैं।
3
चोंचों में जो कीट पकड़ना चाह रहे,
वक्ष धरा का तोड़ा जाए चाह रहे,
वहीं घास की पत्ती में जो जन्तु छिपे,
हर हलचल पर घबराकर भर आह रहे।

मदारी-भगवान, 

शनिवार, 4 दिसंबर 2021

सनम

अभी तो बहुत कुरकुरा हूँ सनम।
हसीनों पे चलता छुरा हूँ सनम।
न डाई रँगे बाल सिर पर रहे,
जमाना घुटे उस्तुरा हूँ सनम।।

बुधवार, 10 नवंबर 2021

मुक्तक


सत्ता के तलवों में चुभती कीलें हैं,
चोरों के सिर पर मँड़राती चीलें हैं,
ये कवि जो हरक्षण में जागा करते हैं,
चलती फिरती कोर्ट और तहसीलें हैं।।

गुरुवार, 27 मई 2021

छवि चित्र

मेरा उनका एक साथ छवि चित्र नहीं है।
सब मित्रों में उनके जैसा मित्र नहीं है।
सबमें बांंटूँ अंतरंगता शोर करूँ क्यों?
कस्तूरी है, बाजारों का इत्र नहीं है।

मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

वसंती होलें

मुक्तक

आओ बन्धु वसंती होलें।
उमगें हृदय वचन यों बोलें।
सरसों जैसी सूक्ष्म काय हों,
फिर भी जगत नेह से धोलें।।1।।

शीत गई अब जड़ता छोड़ो।
तन के, मन के बन्धन तोड़ो।
बहुत किया विध्वंस सृजन में,
शक्ति नदी की धारा मोड़ो।।2।।

पग पग प्रकृति प्रफुल्लित पावन।
गाती राग विराग नसावन।
आओ हम भी आलस छोड़ें,
आता पास दिख रहा फागुन।।3।।

बुधवार, 27 जनवरी 2021

शामत

मुक्तक

बकरियों से भर गया उद्यान है।
और बकरा हो गया जवान है।
पत्थरों की आ गई शामत यहाँ,
रख रहा छुरों पे कोई शान है।।1।।

मेरे पास उसके लिए एक ही उपहार था,
साँसों की खुशबू थी बाहों का हार था।
चाँदी की दीवार मैं लाँघ नहीं पाया,
ऊँची थी बिल्डिंग और बन्द हर द्वार था।।2।।

शुक्रवार, 31 मई 2019

एफबी

तुम भी एफबी पर आये हो वे भी एफबी पर आयीं।
तुम तो असली ले आये पर फेक आईडी वो लायीं।
तुम क्या समझे शाम को मैडम क्योंकर उखड़ीं उखड़ीं थीं,
उसी आईडी के परदे से तुमको ठीक परख पायीं।।
एफबी-फेसबुक

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रविवार, 30 दिसंबर 2018

जागा भाग्य ऐ! बाले

1. अब सुबह क्या बात होगी?
ये सुबह होगी न होगी?
आ अभी अनुराग कर लें।
आ परस्पर अंक भर लें।

2. कल से तुम गुलाबी हो,
किस पर जाल फैलाया।
किसके तृषित अधरों का,
जागा भाग्य ऐ! बाले।

3. माना झूठ है मेरी,
कविता भी कहानी भी।
ये ही तो बहाना था,
मेरे पास तुम आये।

4. बाहर ठंड है बेशक,
रिश्ते गर्म हैं लेकिन।
आओ पास बैठें तो,
पिघले बर्फ थोड़ी सी।

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गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

पर्स

कल सभी को मुफ्त में पर्स बाँटे जायेंगे।
हाथ फैलाना सम्भलकर हाथ काटे जायेंगे।
क्या हुआ नाराज हो तो बन्धु ये बतलाइये,
पर्स बनवाने के हित चमड़ा कहाँ से लायेंगे।

बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

सुनामी

कली यदि देखकर भँवरे को मुस्काई नहीं होती|
समन्दर में सुनामी की लहर आई नहीं होती||
मुझे क्या गर्ज थी बाँहों में उसको भर लिया मैंने,
अगर द्वारे की साँकल उसने खटकाई नहीं होती||



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मंगलवार, 30 जनवरी 2018

बारात

जब कभी भी इस तरफ बारात आती है,
तब नजर के सामने इक रात आती है,
बस जरा से फासले पर कैद बाहों में,
धड़कनों पर धड़कनों की याद आती है|





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सोमवार, 1 जनवरी 2018

रविवार, 31 दिसंबर 2017

स्वागत

पुराना वर्षअलविदा कह रहा है, नया वर्ष बस कुछ ही घंटे दूर खड़ा है| 
ऐसे में दो छोटी छोटी रचनायें अपने ब्लॉग पाठकों के लिये|


[1]
चल पड़ा वो छोड़कर मुझको जवानी की तरह,
बिन रुके बहते हुए दरिया के पानी की तरह||
वो समझ आया नहीं इस बार भी जैसे गणित,
मैं लगाता रह गया अनपढ़ अजानी की तरह||
[2]
अब चलो जो आ रहा उस पर भी डालूँ एक नजर,
बज उठे उम्मीद है इस बार तो दिल का बजर||
हाथ फैलाये खड़ा स्वागत में मैं उसके लिये,
छोड़कर जा ही नहीं सकता है वो मेरी डगर||



 



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मंगलवार, 14 नवंबर 2017

सियासत



बात जब करो शराफ़त से करो।
जब न सुने तो लियाकत से करो।
बात सब सुन लेंगे तुम्हारी मित्रों,
घुमा फिरा के करो, सियासत से करो।।

शुक्रवार, 10 नवंबर 2017

शरारत

कल कली ने मुस्कुराकर फिर शरारत की|
एक भँवरे ने बड़ी सच्ची शिकायत की|
इस शिकायत पर कुचल डाला गया भँवरा,
हर समय पर भीड़ ने इतनी हिमाकत की||

सोमवार, 23 अक्टूबर 2017

न मिली

कभी मकां बदला, कभी दुकां बदली।
जिस गली में वो था वही गली न मिली।
तुम भी मेरी जमात के लगते हो प्यारे।
कभी खोपड़ी न हिली कभी कमर न हिली।।

रविवार, 22 अक्टूबर 2017

बीमारी

ब्याही है या फिर कुंवारी बता दे।
कहाँ जा रही ये सवारी बता दे।।
बड़ी डिग्रियाँ हैं बड़ा डॉक्टर है।
मगर मुझको मेरी बिमारी बता दे।।

शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2017

दुनिया

नजर.के सहारे चला जा रहा हूँ।
कोई बता दे कहाँ जा रहा हूँ।
दुनिया अजब सा तिलिस्मी सफर है,
जहाँ जा रहा हूँ वहीं आ रहा हूँ।

हमारीवाणी

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