गुरुवार, 26 मार्च 2020

राणा प्रताप के वंशज

राणा प्रताप के वंशज हैं बस कहने भर के।
हुआ एक दिन ही कर्फ्यू तो रोते हैं जी भर के।
कोई घर जाने को आतुर कोई खाने दाने,
कोरोना का क्या होना है मौला तू ही जाने।
अभी बीस दिन घोषित बाकी जाने कौन अघोषित।
जनसेवक से धनसेवक तक सभी दिख रहे क्रोधित।

रविवार, 22 मार्च 2020

प्रस्तरेषु प्राणाः

बिना किसी तीज त्यौहार, फैमिली के साथ घर पर पिकनिक। 
जीवन में लिया है कभी ऐसा आनन्द नहीं न। 6 माह में कम से कम एक बार ऐसा ब्लॉक जरूर होना चाहिये। थोड़ी तकलीफ तो हुई बहुतों को, कोरौना जाए न जाए रेल की पटरियों ने, सड़कों ने और पर्यावरण ने आराम अवश्य किया। कुछ प्रदूषण कम हुआ वातावरण का भी और मन का भी। बच्चों ने आनन्द में सही खुलकर ताली पीटी, थाली पीटी तो हम भी प्रौढ़ावस्था छोड़कर गोता लगा गए बालपन में। भूल गए कि हम एक थकन व उदासी से भरी दुनिया में रहते हैं। गाड़ियों मोटरों व कारखानों के शोर से पशु पक्षियों ने भी निजात पायी होगी वे भी आनन्दित हुए होंगे। पेड़-पौधों ने #कोरौना वायरस को धन्यवाद दिया होगा कि आज उसकी वजह से ही उन्होंने कार्बन डाइऑक्साइड से छुटकारा पाया। उन्हें भी छुट्टी का अधिकार है। हम तो भूल ही गए थे "प्रस्तरेषु अपि प्राणाः भवन्ति"।
थोड़े दिन के लिए हिमालय की कंदरा में बसे सन्यासी हो जाएं। आओ एक तपस्या में संलग्न हो जाएं। मजबूरी में ही सही समाधिस्थ हों, 21 दिन में बुद्धत्व प्राप्त करें। इस संसार की निस्सारता को समझें। संसार दुखों का घर है, दुखों का कारण तृष्णा है, तृष्णा के नाश से दुःखों का नाश हो सकता है, अष्टांगिक मार्ग पर चलकर तृष्णा का नाश हो सकता है। घर पर रहें योगाभ्यास करें, योगाभ्यास से परहेज है तो अपने धर्मानुसार अपने ईश्वर, खुदा या गॉड किसी का भी ध्यान करें और उससे कष्टों को सहन करने की सामर्थ्य माँगें और प्राणिमात्र के कल्याण की कामना करें। आत्मानुशासन के अभ्यास का ऐसा अवसर फिर मिले न मिले, तो मत चूको चौहान। तुम्हें आँखों पर पट्टी बाँधकर कोरोना को सटीक निशाने पर लेकर परास्त करना है।
चाहें तो घर को जेल में बदल लें और स्वयं को यह सोचकर स्वयं को यातना दें कि हाय! व्यापार, पढ़ाई कैरियर का नुक्सान हो रहा है। अरे! भाई लाभ हानि जीवन मरण यश अपयश विधि हाथ। तुम्हारे हाथ में कुछ है तो कर्म। 
चुनाव करना है कि एकांतवास को जेल समझना है आध्यात्मिक उन्नति व दैवीय शक्ति के अर्जन का अवसर।

सोमवार, 9 मार्च 2020

उद्धव-कृष्ण

उद्धव कमाधमाकर होली की छुट्टियों में बड़े उत्साहित होकर द्वारिकापुरी पहुँचे तो बड़ा हैरान-परेशान हो गए। न कहीं रंग न राग, न कोई समारोह न कोई फाग। अपने घर बाद में गए पहले कन्हैया के घर पर ही जा पहुँचे। 16108 रानियाँ अपने-अपने भवन में और कन्हैया उदास अपने महल के बरामदे में शून्य की ओर निहार रहे थे। जैसे ही उद्धव को अपनी ओर आते देखा हड़बड़ाकर खड़े हो गए। बोले, "ऐ! ऐ! उद्धव वहीं खड़े हो जाओ, पास मत आना।" 
अब तो उद्धव और परेशान ठिठककर वहीं खड़ा हो गया, "भगवन्! क्या मुझसे कोई अपराध हो गया है? मुझे क्यों दुत्कार रहे हैं?"
भगवान बोले, "उद्धव क्या बतायें? अपराध तो मुझसे हो गया। सृष्टि निर्माण के समय जब मैं ब्रह्मा के रोल में प्राणियों का निर्माण कर रहा था तब मूल उत्पाद के साथ कुछ मल उत्पाद भी तैयार हो गए। ये मल उत्पाद मानव-मात्र के लिए बहुत हानिकारक थे। मैंने उन्हें शाप देकर निष्क्रिय कर दिया था। आजकल उन्हीं में से एक शापमुक्त होकर संसार भ्रमण पर निकल पड़ा है। ये सब उसी का प्रभाव है। कि तुम मेरे अभिन्न होते हुए भी दूर रहने को विवश हो।"
उद्धव ने पूछा, "हे! जनार्दन जब आपने उसे निष्क्रिय कर दिया था, तो वह सक्रिय कैसे हो गया?"
भगवान ने बताया, " उद्धव! यह प्रकृति का नियम है समस्या के साथ ही समाधान जन्म लेता है। मैंने उसे शाप के साथ वरदान भी दिया  कि जब मनुष्य स्वयं भगवान की तरह नवीन सृष्टि में संलग्न हो जाएगा तब वह सक्रिय हो जाएगा। एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में गमन करते हुए अपना प्रभाव दिखाएगा और मनुष्यों को उनकी सीमाएं बताएगा। कुछ एक के प्राण भी लेकर जाएगा।"
उद्धव ने कहा, "भगवान तो क्या उपाय है?होली का त्यौहार क्या ऐसे ही बीत जाएगा?"
भगवान बोले, "सभी नेताओं व सरकारी-अर्धसरकारी संस्थाओं ने अपने-अपने होली समारोह रद्द कर दिए हैं। अगर अस्पताल नहीं जाना चाहते तो बिना समय गवांये घर जाओ और केवल फेसबुक और व्हाट्स एप पर होली मनाओ। हाँ टीवी देख सकते हो। कोई तुम्हारी तरफ बढ़े तो बीस फिट दूर ही रोक दो।"
उद्धव ने अंतिम प्रश्न किया, " भगवान ये मल उत्पाद है क्या जिससे आप इतना घबराये हुए हो? नाम बता दो प्लीज।"
भगवान मुस्कुराये और बोले, "उद्धव तुम बड़े भोले हो मीडिया पिछले महीने भर से उसके अलावा किसी और का नाम नहीं ले रहा है, और तुम हो कि हीहीही...."

इसीलिए पाठकों को मेरी ओर से होली की मौखिक हार्दिक शुभकामनाएं।

शनिवार, 7 मार्च 2020

एलियन

उसने नहीं कहा लड़ो, न उसने कहा मैं हूँ, यह मनुष्य कहता है वह मुझे मिला था। जो विश्वास नहीं दिला पाया उसे दूसरे मनुष्यों ने पागल करार दिया। जो विश्वास दिला पाया उसे देवता कह दिया। उसका कहा सही-गलत सब धर्म-ग्रन्थ हो गए। जहाँ जहाँ उसने कहा वहीं वहीं हमने उसे बैठाया। उसने जिस जिस रूप में बताया हमने पूजा। लेकिन हममें से किसी ने भी उसकी वह बात नहीं मानी जो उसने कही थी। हम सबने उसकी वह बात मानी जो हमने सुनी थी। और सुनते हम सब वही हैं जो हमारे मतलब को पूरा करता है। सब धर्म के मानने वालों ने अपने अपने मतलब के गढ़ लिए और इस्तेमाल कर लिए जहाँ नहीं इस्तेमाल कर पाये वहाँ बाप बदल लिए उसकी क्या बिसात जिसे उन्होंने देखा नहीं। तो आप भी वही करो जो सब करते हैं नहीं तो लोग एलियन समझ कर आपसे छेड़छाड़ करेंगे।

हमारीवाणी

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