एक चन्द्र नभ राजे, दूजो चन्द्र मुख चन्द्र,
तीजो चन्द्र माँगबेंदी माथ पे दिखानो है।
चौथो चन्द्र पतिदेव सामने जो दीख गए,
करवा में चार चन्द्र मन अनुमानो है।
कौन वालो चन्द्र तुम्हें पूजनो है चन्द्रमुखे!
बार बार यही प्रश्न चित्त उमड़ानो है।
सरल सुभाय किन्तु वाणी में वणिक सी,
बोल पड़ी भानुमती, राज ही छिपानो है।।
साथ ही जिन क्षेत्रों में चन्द्रमा आज दिखाई नहीं पड़ रहा है, उस क्षेत्र की बहनों के लिए अतिरिक्त पंक्ति
रूप लखि चन्द्रमुखिन चन्द्रमा लजाइ के,
सामने न आवे मेघ मध्य जा लुकानो है।।