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शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

बीदर



यह स्थल वर्तमान में हैदराबाद के पास स्थित है| किसी समय बीदर वारंगल राज्य के अंतर्गत था| इस पर गयासुद्दीन के पुत्र जूना खां के द्वारा अधिकार करने पर यह दिल्ली सल्तनत के अधीन आ गया| 1347 में बहमनी सल्तनत की होने पर बीदर उसका अंग बन गया| 1423 में सुल्तान अहमदशाह ने बीदर को अपने साम्राज्य की राजधानी बनाया| 1526 में अली बरीद ने बीदर के बरीदशाही वंश की स्थापना की| मध्यकाल में बीदर दक्षिण भारतीय वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध था| मुहम्मदशाह के प्रधानमन्त्री महमूद गवां द्वारा 1472 में बीदर में एक मदरसा बनवाया गया| 1619 में इसे आदिलशाही शासक इब्राहीम आदिलशाह ने बीजापुर में मिला लिया गया|




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गुरुवार, 4 जनवरी 2018

गोलकुंडा

 यह स्थान आंध्रप्रदेश के हैदराबाद से 7 मील पश्चिम में है, यहाँ देवगिरि के यादवों व वारंगल के काकतीयों का अधिकार रहा| 1310 में यह खिलजी सल्तनत का हिस्सा बना उसके बाद यह मुक्त हो गया| 1425 में यह बहमनी सल्तनत का हिस्सा बना| मुगलकाल में औरंगजेब ने गोलकुंडा का कुतुबशाही वंश का अंत कर दिया और उसे अपने साम्राज्य में मिला लिया| गोलकुंडा अपनी हीरों की खानों के लिए अत्यधिक प्रसिद्ध है| यहाँ 400 फीट ऊंची ग्रेनाईट की पहाड़ी पर बना हुआ एक किला है| इस किले में कुतुबशाही बेगमों के भवन उल्लेखनीय हैं| किले के अंदर हैदराबाद के निजामों का बनवाया नौमोहल्ला नामक भवन भी है| किले के अंदर इब्राहीम बाग है जिसमें कुतुबशाही सुल्तानों के मकबरे हैं जिन मकबरों पर हिन्दू वास्तुकला के विशिष्ट चिन्ह कमल पुष्प, पत्र तथा कलियाँ हैं तथा प्रक्षिप्त छज्जे, स्वास्तिक, स्तम्भ-शीर्ष आदि बने हुए हैं|



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