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शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

मसुलीपट्टम


यह स्थल तमिलनाडु राज्य में कृष्णा नदी के मुहाने पर स्थित बन्दरगाह था| यह 17 वीं सदी में अपने उत्कर्ष पर था| 1611 में ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने यहाँ अपनी फैक्ट्री लगाई थी| 1632 में गोलकुंडा के शासक ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी को व्यापार करने के लिए ‘सुनहला फरमान’ जारी गया| 1686 में डच, 1690 में अंग्रेज, 1750 में फ़्रांस 1750 में ही पुनः अंग्रेजों ने इस पर अधिकार कर लिया| इस बन्दरगाह से सूती वस्त्र, गलीचे एवं धागे का निर्यात किया जाता था|



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शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

देवल



यह स्थल आजकल समुद्र में डूब गया है, किन्तु किसी समय यह सिन्धु नदी के मुहाने पर स्थित एक बन्दरगाह था| इसे दीदूल सिंध के नाम से भी जाना जाता है| मोरलैण्ड ने “इंडिया ऐट द डेथ ऑफ़ अकबर” में लिखा है कि मानसून की दृष्टि से इस बन्दरगाह की स्थिति ठीक नहीं थी| 





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मंगलवार, 2 जनवरी 2018

कायल



यह स्थान केरल के जनपद तेन्नावेली में ताम्रपर्णी नदी के तट पर है| इस स्थान का वर्णन मार्कोपोलो ने अपने यात्रा वृत्तान्त में किया है| उस समय यह एक प्रसिद्ध बन्दरगाह था| मार्कोपोलो यहाँ 1288 व 1299 में दो बार आया| 




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