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शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

गया



यह स्थल बिहार में है| इस स्थल से थोड़ी ही दूर पर बोधगया है| बोधगया में गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था| वर्तमान में भी यह बौद्धधर्म का तीर्थ स्थल है| अपने शासन काल के दसवें वर्ष में अशोक ने यहाँ की यात्रा की थी| 411 में प्रसिद्ध तीर्थयात्री फाहियान ने यहाँ की यात्रा की थी| यहाँ ह्वेनसांग ने अपने कदम रखे| पौराणिक कथाओं के अनुसार गया में गयासुर नामक राक्षस निवास करता था जिसे भगवान विष्णु ने यहाँ से निकाल दिया| यहाँ मगध विश्वविद्यालय भी है| गया फल्गु नदी के किनारे स्थित है जिसे बोधगया में निरंजना कहा जाता है|




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शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

नानाघाट

यह स्थान महाराष्ट्र के पुणे जनपद में है| यहाँ स्थित एक गुफा में सातवाहन नरेश शातकर्णी की नागानिका का एक अभिलेख है| जिससे ज्ञात होता है कि शातकर्णी ने अनेक अश्वमेध व राजसूय यज्ञ किये थे| उसने ब्राह्मणों को विभिन्न प्रकार के दान भी दिए थे| इस अभिलेख द्वितीय शताब्दी में बौद्धधर्म के उत्कर्ष के पश्चात हिन्दू धर्म के फिर से विकास का ब्यौरा भी प्राप्त होता है| इस अभिलेख में शातकर्णी को ‘सिमुक वंश का धन’ कहा गया है| शातकर्णी की मृत्यु के पश्चात नागनिका ने राजकार्य भी संभाला|




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मंगलवार, 2 जनवरी 2018

जुन्नार



यह स्थल महाराष्ट्र राज्य के पुणे से ४० मील उत्तर में है| यहा 150 शैल गुहायें जिनमें से 10 चैत्य तथा शेष बौद्ध विहार हैं| इन गुहाओं का समय पहली से दूसरी शताब्दी का है| इन गुहाओं में गणेश लेख व तनुजा लेख महत्त्वपूर्ण हैं, यहाँ मूर्तियाँ नहीं है किन्तु कुछ गुहाओं की दीवार पर लक्ष्मी, कमल, गरुण व सर्प आदि के चित्र उत्कीर्ण हैं जो बौद्धधर्म के हीनयान सम्प्रदाय से सम्बन्धित है| यहाँ के चैत्य गृह आयताकार हैं जिनकी छतें सपाट और मण्डप स्तम्भ रहित हैं| एक चैत्य गोलाकार भी है| इस आकृति का चैत्य पश्चिम भारत में नहीं मिलता| यहाँ की एक गुफा से 124 ईस्वी का शक नरेश नहपान के मन्त्री अयम का एक अभिलेख मिला है जिसमें नहपान को महाक्षत्रप कहा गया है|




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बुधवार, 13 दिसंबर 2017

विराट नगर

 यह स्थल जयपुर के पास है, यहाँ से श्री दयाराम शास्त्री के नेतृत्व में हुए उत्खनन में स्लेटी रंग के चित्रित मृणपात्र प्राप्त हुए हैं| मौर्य काल में यह बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र था| यहाँ से एक शिलालेख प्राप्त हुआ जिसमें अशोक अपना बौद्ध होना स्वीकार करता है|


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