दिलों के बीच भी सरहद होती है,
जिसकी ऊँचाई बेहद होती है,
बन तो बहुत जल्दी जाती है,
किन्तु न मिटने की जिद होती है।
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बुधवार, 13 नवंबर 2019
दिलों के बीच
मंगलवार, 12 नवंबर 2019
मराठी मानुस
महत्वाकांक्षा इतनी बड़ी हो गई कि जनता का निर्णय सिर के बल खड़ा हो गया। सबसे बड़ी पार्टी होकर भी बीजेपी महाराष्ट्र में सरकार नहीं बना पाई। शिवसेना गठबंधन धर्म नहीं निभा पाई और नौबत राष्ट्रपति शासन की आ गयी। मुझे यह समझ में नहीं आता कि जो इलेक्शन की नौटंकी जनता के पैसे से खेली गई उसकी भरपाई कौन करेगा।
जाहिर है जब गठबंधन को स्पष्ट बहुत मिला तो उसे दोष नहीं दे सकते। मेरी समझ से यदि बहुमत प्राप्त करके भी कोई दल सरकार न बना पाएं तो उस दल के सभी जीते विधायकों की सम्पत्ति जब्त करके उनके पुनः चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
राष्ट्रपति शासन ही लगना था तो जनता तो ठगी गयी। संविधान निर्माताओं ने कल्पना भी न की होगी कि सत्ता की चाहत एक दिन देश हित से बड़ी हो जाएगी।
थू है उनपर जो अपने को जनता का सेवक कहकर वोट झटकते हैं और इलेक्शन के बाद जब सत्ता की मलाई हाथ नहीं आती तो अपने कर्तव्य से हट जाते हैं। वाह रे मराठी मानुस। धिक्कार है!
मंगलवार, 5 नवंबर 2019
सारी उमर जाती
बुधवार, 30 अक्टूबर 2019
असमान भुजा के चतुर्भुज का क्षेत्रफल
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