बुधवार, 15 मई 2019

प्रेम और चुनाव

चुनाव और प्रेम में भी अजीब घालमेल है,
सिर्फ शब्दों, इशारों व भावनाओं का तालमेल है।
वहाँ भी चुनाव था,
यहाँ भी चुनाव है,
वहाँ न कुछ प्रभाव था,
यहाँ न कुछ प्रभाव है,
दिल खोलकर सब कह दिया,
तब भी न कुछ दुराव था,
अब भी न कुछ दुराव है।।

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सोमवार, 13 मई 2019

फेंकू

बादलों का ये फायदा भी?
कि प्रेमिका से मिलने पाकिस्तान चले जाओ,
कोई देखेगा नहीं,
वैसे कभी कभी फेंकू होना भी बुरा नहीं।

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रविवार, 12 मई 2019

प्रथम संस्करण अन्तिम हो गया।
ढेरों साहित्य यूँ ही खो गया।
मुफ्त में बंटा और रद्दी हो गया,
इसलिये मैं प्रकाशन में फिसड्डी हो गया।।.

ऐसा मैं इसलिये कह रहा हूँ कि कुछ देर पहले मुझे 2004 में छपी हुई श्री बाबू राम शुक्ल 'मंजु' निवासी सीतापुर रचित दो पुस्तकें महाकाव्य 'रघुवंशम' व 'कुमार सम्भवम' के अवधी भाषा के काव्यानुवाद प्राप्त हुए हैं। पुस्तक के पढ़ने के बाद लगता है निश्चय ही कवि ने अथक प्रयास किया होगा किन्तु मैं निजी तौर पर जानता हूँ कि कवि का जीवन मुफलिसी में गुजर गया। कितना अच्छा होता कि उसने अपना समय बाजार के लिए लेख लिखने में लगाया होता तो शायद हाथोंहाथ लिया जाता।

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रविवार, 28 अप्रैल 2019

अनचाहे


चाहता हूँ कि
प्रेम न करूँ उसे।
समस्या अनेक,
उम्र, जाति, धर्म,
व्यवसाय, रँग-रूप,
धन-दौलत
और भी बहुत कुछ।
असामान्य असाधारण,
किन्तु चाहने से क्या?
कोई जोर नहीं,
जो होना था हो गया।
अनचाहे मैं कहीं खो गया।

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