रविवार, 26 मई 2019

पांडे जी का बेटा

आज पांडे जी के बेटे से मुलाकात हो गई, बेचारा बहुत परेशान है इन दिनों। गर्लफ्रेंड तो गर्लफ्रेंड बहन भौजाइयाँ सभी कन्नी काट के निकल जाते हैं और बीबी शक की नजर से देखती है सो अलग। ऐसा हो भी क्यों न जब खुले आम उसके मुँह से कहलवाया जा रहा है, "पांडे जी का बेटा हूँ, चिपक के चुम्मा लेता हूँ।"
अजी ये भी कोई बात हुई सीधे सीधे पांडे जी के बेटे का चरित्र चित्रण कर रहे हो और मजे ले रहे हो। असली मजा तो तब आता है जब आपको ये पता चलता है कि इस गाने से प्रभावित होकर किसी और का लड़का आपकी लड़की को चिपककर चुम्मा ले लेता है और आप मुँह छुपाते फिरते हो। अरे भाई शादी ब्याह का मनोरंजन अपनी जगह, अभिव्यक्ति की आजादी अपनी जगह, और जाति वर्ग का चरित्र चित्रण अपनी जगह। हम तो ठहरे ब्राह्मण सुन लेते हैं उल्लुओं की बातें भी। अभी कुछ दिनों पहले लोग पहुँच गए थे कोर्ट में बाबा तुलसीदास को लेकर कि कुछ चौपाइयाँ वर्ण व्यवस्था के सम्बंध में आपत्तिजनक हैं, उन्हें श्रीरामचरितमानस से निकाल दिया जाए। पता नहीं निकाली गईं या नहीं। वह तो रही पाँच सौ वर्ष पहले की बात, किन्तु यह मामला ताजा है। पांडे जी का बेटा बहुत भला है वह यूँ ही किसी को चिपककर चुम्मा नहीं लेगा, यह भलमनसाहत उसे अपने बाप से मिली है। देखो सबूत मत माँगो क्या इतना काफी नहीं है कि पांडे जी ने गाना लिखने, गाने, रिकॉर्ड करने व बजाने वाले का बैंड नहीं बजाया। और तो और कहीं आपत्ति तक दर्ज नहीं कराई।
अब मैं इतना क्यों लिख गया? तो भाई मैं शुक्ला हूँ और पांडे जी का बेटा मेरा भी कुछ लगता है मुझे उससे सहानुभूति है। मुझे अमिताभ बच्चन अभिनीत वह गाना याद आता है,"मुहल्ले वालों अपनी मुर्गी सम्भालो मेरा मुर्गा जवान हो गया।" कहीं वाकई पांडे जी का बेटा अपनी पर आ गया और चिपक के चुम्मा लेने लगा तो पता नहीं किस किस को अपनी अपनी बेटियाँ सम्भालनी पड़ जायेंगी।

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