गुरुवार, 18 मई 2023

क्या याचना करूँ मैं

11/3/1995

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अब आप ही बता दें,

क्या याचना करूँ मैं?

जो दे चुके हो अब तक,

उसको कहाँ धरूं मैं?

दो वक्त लोन रोटी,

तन को ढकूँ लँगोटी,

सो जाऊँ यार जिसमें,

वह झोपड़ी न छोटी|

अतिरिक्त चाहिए क्या,

क्या याचना करूँ मैं?

गैरों से माँग होती,

अपनों से पूर्ति होती,

तुझसे जुदा न मेरी,

कभी आत्मा है होती,

तुम यदि कहो की मांगो,

क्या भावना करूँ मैं?

तेरा धूर्त यार जाने,

सब कुछ तेरे खजाने,

तेरा हाथ सिर पे जब तक,

सभी मैंने अपने माने,

सच्ची रहे ये यारी,

दृढ़ कामना करूँ मैं|


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रविवार, 2 अप्रैल 2023

मैच जीतेंगे हमीं


देखकर तुमको हमारी साँसें रहती हैं थमीं। 
शीर्षासन में जमे हो या कि सिर पर है जमीं।
ये भी हो सकता है मैं ही हो गया उल्टा खड़ा,
इसलिए हर चीज में दिखने लगीं मुझको कमीं।
हौसला था इसलिए हम भी तरक्की पा गए, 
अन्यथा पंखों में अब तक है बहुत ज्यादा नमीं|
बॉल सब खेलीं नहीं मैं तो डिफेंसिव ही जिया, 
किन्तु मन में था हमेशा मैच जीतेंगे हमीं।

शुक्रवार, 17 मार्च 2023

बच्चे!


बच्चे! तुम्हारी दशा पशुओं की तरह हो गई है,
उसके चरागाह तुम्हारे खेलने की जगह खो गई है।
पशुओं की हालत हमेशा से खस्ता है,
तुम्हारी पीठ पर भी भारी सा बस्ता है।
उन्हें तो हमने रस्सियों में बाँधा है
यहाँ हमारे सपनों की बन्दूक है और
तुम्हारा काँँधा है।

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2023

फागुन


विषय ---फागुन
विधा ----छंद - कुण्डलिया

1. फागुन आया देखकर आम उठा बौराय।
    पिया बसे परदेश में, कोयल रही बुलाय।
    कोयल रही बुलाय, धरा है धानी धानी।
    मादकता सिर चढ़ी कर रही पानी पानी।
    समझ न आवें मित्र! ससुर बहुओं के लच्छन।
    मन को दे भरमाय मदन का भाई फागुन।।
 
    2- फागुन चढ़ा मुंडेर पर, घोट रहा है भाँग।
        देवर जी का लग रहा, नम्बर हो गया राँग।
        नम्बर हो गया राँग, मनाते घूमें भाभी।
        हर ताले की पास रखें जो अपने चाभी।
        चाहत गोरा होंय माँगते क्रीमें साबुन।
        भाभीजी की बहन भा गई अबकी फागुन।।
               

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