बुधवार, 3 जुलाई 2013

प्रकृति हो गई स्वच्छन्द

क्रोध में झटक दिया सिर,
नदियाँ विह्वल हुईं फिर,
देखते ही देखते शिव ने,
शवों के अम्बार लगा दिए।
उत्तराखण्ड में लोगों की,
रोजी रोटी घर द्वार हिला दिए।
प्रकृति हो गई स्वच्छन्द।
मनुष्य सिद्ध हुआ मतिमन्द।

प्यार का जलवा

तेरे प्यार का जलवा हर सूँ देखा।
मैंने दुनिया को देखा कुछ यूँ देखा।

छवि माध्वी

अम्बर से उतरी रजनी तू,
घूंघट घन तो चेहरा चाँद।
प्रेयसि तनिक उजाला कर दे।
रूप राशि दर्शन का वर दे।
छवि माध्वी मन पीने वाला।
छिपा न अपने तन का प्याला।

मंगलवार, 18 जून 2013

दर्पण का करिहौं

तिय समुहे दर्पण का करिहौं।
नैनन में निज बिम्ब निहरिहौं।
वहि छवि में अपनी छवि लखिहौं।
रूप -राशि हिरदय में  रखिहौं।

हमारीवाणी

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