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सोमवार, 8 जनवरी 2018

गुलबर्गा

वारंगल वंश के काकतीयों ने इस नगर को बसाया था| मुहम्मद बिन तुगलक ने इसका नाम अह्सानाबाद रखा| बहमनी वंश के संस्थापक अलाउद्दीन हसन ने इसे 1347 ईस्वी में बहमनी राज्य की राजधानी बनाया| 1425 ईस्वी तक गुलबर्गा बहमनी राज्य की राजधानी रहा| यहाँ स्थापत्य कला की श्रेष्ठ मिसाल जामा मस्जिद है| जिस पर फारस की वास्तुकला शैली का प्रभाव है| यहाँ फारसी कला से प्रभावित फिरोजशाह बहमनी का सुन्दर मकबरा भी है| अन्य इमारतों में ख्वाजा नवाब की दरगाह, हसन गंगू का मकबरा, महमूद शाह का मकबरा, चाँदबीबी का मकबरा, सिद्धि अम्बर का मकबरा, चार गुम्बद, अफजल खां की मस्जिद और लंगर की मस्जिद आदि हैं|



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मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

जालौर


जालौर का दुर्ग अरावली पहाड़ी पर चार सौ फीट की ऊंचाई पर सूंकड़ी नदी के तट पर स्थित है| इसे नौवीं शताब्दी में परमारवंशीय राजाओं ने बनवाया था| इस पर चौहानों व चालुक्यों के बाद 1310 में अलाउद्दीन खिलजी का आधिपत्य हुआ| उसने इसे कान्हड़ देव से जीत लिया था| कान्हड़ देव की वीरता की कहानियाँ आज भी मारवाड़ी लोक संस्कृति में व्याप्त हैं| किले में प्राचीन महल, कान्हड़ देव की बखड़ी, वीरमदेव की चौकी, जैन मन्दिर व मलिकशाह की दरगाह आदि वास्तुशिल्प के सुन्दर नमूने हैं|
 


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सोमवार, 18 दिसंबर 2017

चित्तौड़

 राजस्थान स्थित चित्तौड़ शिशोदियावंशीय शासकों की आन बान और शान का प्रतीक रहा है| 1303 में अलाउद्दीन खिलजी ने इस पर आक्रमण कर दिया| यहाँ के शासक राणा रतन सिंह पराजित हुए| राणा कुम्भा जिसका शासन 1433 से 1468 में रहा उसने यहाँ कई इमारतें बनवाईं| 1534 में बहादुरशाह ने इस पर आक्रमण किया तब यहाँ की शासिका कर्मवती थीं उन्होंने हुमायूं को राखी भेजी किन्तु हुमायूँ ने उसकी कोई सहायता नहीं की|यहाँ के स्मारकों में नौमन्जिला कीर्ति स्तम्भ (122 फुट ऊँचा लगभग),विजय स्तम्भ, कुम्भ श्याम सुन्दर मन्दिर, गोमुख कुण्ड और तुलजा माता का मन्दिर प्रमुख हैं| भामाशाह की हवेली तथा पद्मिनी महल भी यहाँ दर्शनीय हैं| यहाँ के दुर्ग की लम्बाई ८ किमी व चौड़ाई 2 किमी है तथा यह राजस्थान का सबसे बड़ा दुर्ग है जिसमे जयमल व कल्ला राठौर की छतरियां हैं|

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शुक्रवार, 8 दिसंबर 2017

जैसलमेर




यह दुर्ग राजस्थान में 250 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है| इसकी लम्बाई 1500 फीट व चौड़ाई 750 फीट है| इसकी स्थापना 1155 में की राव जैसल ने कराई थी| यह पीले पत्थरों का बना है| इसे सोनार के किले के नाम से भी जानते हैं|
जालौर
जालौर का दुर्ग अरावली पहाड़ी पर चार सौ फीट की ऊंचाई पर सूंकड़ी नदी के तट पर स्थित है| इसे नौवीं शताब्दी में परमारवंशीय राजाओं ने बनवाया था| इस पर चौहानों व चालुक्यों के बाद 1310 में अलाउद्दीन खिलजी का आधिपत्य हुआ| उसने इसे कान्हड़ देव से जीत लिया था| कान्हड़ देव की वीरता की कहानियाँ आज भी मारवाड़ी लोक संस्कृति में व्याप्त हैं| किले में प्राचीन महल, कान्हड़ देव की बखड़ी, वीरमदेव की चौकी, जैन मन्दिर व मलिकशाह की दरगाह आदि वास्तुशिल्प के सुन्दर नमूने हैं|


रणथम्भौर




राजस्थान स्थित इस किले का निर्माण ईसा की पांचवी शताब्दी में महाराज जयंत ने करवाया था| बारहवीं शताब्दी में चौहान राजाओं ने इस दुर्ग पर कब्जा कर लिया| 1192 में पृथ्वीराज चौहान के पुत्र ने यहाँ चौहान वंश की नींव डाली| तेरहवीं शताब्दी के अंत में इस दुर्ग पर अलाउद्दीन खिलजी ने हम्मीरदेव को पराजित कर इस पर अधिकार कर लिया| इस दुर्ग में प्रवेश हेतु चार दरवाजे हैं जिनमे से तीसरे व चौथे का निर्माण राजा जयसिंह ने करवाया था|

हमारीवाणी

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