सोमवार, 1 फ़रवरी 2021

दृष्टिदोष

दृष्टि की बात है कौन, कहाँ और क्या देख बैठे कुछ कह नहीं सकते? मैं 100 % विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि जब-जिसने भी यह लोगो बनाया होगा उसके हृदय में रंचमात्र भी नहीं आया होगा कि इस लोगो का एक अक्षर महिलाओं के लिए अपमानजनक है। किन्तु एक महिला नाज पटेल को यह नजर आया।  कमाल इस बात का है कि मुम्बई साइबर क्राइम सेल को भी यह आपत्तिजनक लगा। कम्पनी ने अपना लोगो बदल दिया। कम्पनी क्या करे। उसके लिए व्यवसाय महत्त्वपूर्ण है, यह लोगो न सही कोई दूसरा सही। किन्तु मेरे मन में प्रश्न मचल उठा कि क्या इस तरह भी बुराइयाँ देखी जायेंगी। अगर ऐसा हुआ तो बहुत कुछ बदलना पड़ेगा। मेरे विचार से ईश्वर को भी अपना प्रोडक्ट बदलना पड़ेगा। कटहल के कोये(बीज) वो तो गले के नीचे बिल्कुल भी नहीं उतरेंगे न ही चबाये जा सकेंगे। क्यों? शायद नाज पटेल बेहतर जानती होंगी। 
कश्मीर शासक मिहिरकुल ने सिंहल देश पर इसलिए आक्रमण कर दिया क्योंकि उसकी पत्नी ने जो चोल ओढ़ रखा था उस पर गौतम बुद्ध का पैर का चिन्ह बना हुआ था और वह पैर का चिन्ह उसके कुचों अर्थात स्तनों के पास हृदयस्थल में आकर ठहरता था। बताता चलूँ उसके समय में सिंहल में बौद्ध धर्म का प्रभाव था और यह चोल दर्शाता था कि इसे धारण कर उसने भगवान बुद्ध के चरणों को हृदय में स्थान दिया है, किन्तु दृष्टि तो दृष्टि वह भी आततायी शासक की। काल हो गई मिहिरकुल की दृष्टि कि वह श्रद्धा को भी अश्लील समझ बैठा। मिहिरकुल कश्मीर का शासक था उन दिनों। कश्मीर से गुजरात से होकर समुद्री मार्ग से उन दिनों व्यापार हुआ करता था। कोई सिंहल व्यापारी ही उसे रानी को भेंट कर गया था। संभलकर आजकल पग पग मिहिरकुलों से पटा पड़ा है। 
इनका वश चले तो ये गायत्री मंत्र से धीमहि धियो योनः प्रचोदयात् को बदलवा दें। आम के संस्कृत पर्याय चूतम् का भी निषेध करा दें। वाल्मीकि रामायण का तो पढ़ना ही बन्द हो जायेगा जिसमें बोलने अथवा कहने के अर्थ में सैकड़ों बार चोदयति शब्द का प्रयोग किया गया है। बन्धु नजर में ही दोष आ गया है आजकल। जो है सो अच्छा ही है।
अरे! जहाँ विचार प्रदूषित हो जाते हैं वहाँ कुछ भी हो सकता है।
इन्टरनेट से साभार 
इन्टरनेट से साभार

2 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसे मत बोलिए, मोहतरमा की बहुत पारखी नज़र है। नाराज़ हो जाएंगी।😊😊😊

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    1. भयभीत लोगों को लेखन छोड़ देना चाहिए। आपकी बहुमूल्य टिप्पणी के लिए धन्यवाद भाई। ☺️☺️☺️

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