गुरुवार, 16 जुलाई 2020

प्राइवेट स्कूल व संकटकाल

प्राइवेट विद्यालय विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के आजकल घोर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। कुछ लोग तर्क देते हैं कि प्राइवेट विद्यालयों ने खूब कमाया उन्हें क्या दिक्कत तो बन्धु कब्र का हाल मुर्दा ही जानता है। पैसा आनी जानी चीज है किसी के पास जमा रहती हो तो रहती हो मेरे जैसे लोगों के पास नहीं रहती। आज मुझे मेरे पिता जी याद आते हैं पैसा बचाकर रखने को लेकर उनसे प्रायः मेरी बहस हो जाती थी। वह कहते थे संकट काल के लिए कुछ रकम बचाकर रखनी चाहिए मैं उनकी बात को अभी तक हवा में उड़ाता चला आया था। उनको गुजरे 3 माह भी नहीं बीते थे कि मुझे पता चल गया वह सही थे और मैं गलत। काश मैंने कभी उनकी बात को गम्भीरता से लिया होता। मैं प्रबन्धक हूँ किसी तरह से अध्यापकों को घर घर भेज कर पैसा जुटा रहा हूँ वह भी अप्रैल मई जून की फीस कोई अभिभावक नहीं दे रहा है कोई कोई अभिभावक मार्च व इससे पहले की फीस जमा करने में नाराज हो रहे हैं किसी किसी अशिक्षित अभिभावक ने कुछ अपशब्द भी कहे। खैर जो उपलब्ध हो पाया है उसमें अप्रैल मई का वेतन दे रहा हूँ शेष विद्यालय खुलने पर। ईश्वर मुझे क्षमा करे।

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