सोमवार, 31 अगस्त 2020

विषमबाहु त्रिभुज की माध्यिका का सूत्र

 
दिए गये त्रिभुज ABC में 3 माध्यिकाएं AD, BFCE हैं| AB= b, BC= a और AC= c है| इनकी लम्बाई के लिए निम्नलिखित सूत्र हैं|




















 




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बुधवार, 26 अगस्त 2020

है तो नहीं

प्यार अंधा है मगर मैं तो नहीं।
प्यार मुझको भी कहीं है तो नहीं।
गुलगुले किसको नहीं भाते बता,
गुलगुलों की मार का भय तो नहीं।
पोतकर चेहरा हसीं दिखना सरल,
किन्तु आँखों में चमक है तो नहीं।
मैं भी दुबला हूँ किसी की याद मे,
वैद्य जी देखो कहीं क्षय तो नही।
द्वार पर जिसके खड़ा वह घर नहीं,
गैर के पहलू में वो शय तो नहीं।
पास है मन्जिल बहुत माना 'विमल'
पर तुझे मन्जिल मिले तय तो नहीं।


रविवार, 23 अगस्त 2020

हिन्दी व संस्कृत की दुर्दशा

प्रायः चर्चा होती है हिन्दी की दुर्दशा हो रही है। तो भइया इस सब का कारण यह है कि निचली कक्षा से ही हम अंग्रेजी की शुध्दता पर बल देते हैं और हिन्दी की उपेक्षा करते हैं। अंग्रेजी पढ़ाने के लिए तो जूनियर या माध्यमिक स्तर पर ट्यूशन लगवाते हैं किन्तु सोंचते हैं बालक बालिका हिंदी अपने आप सीख लेगा या पढ़ लेगा। स्कूलों में अध्यापक चयन के समय भी प्रबन्धकों और अभिभावकों को प्रायः यह कहते सुना है कि अंग्रेजी, विज्ञान या गणित का कोई अच्छा टीचर बताओ। कभी यह नहीं कहते सुना कि हिन्दी, संस्कृत, समाज विज्ञान या कला का कोई अच्छा अध्यापक बताओ। इनके बारे में धारणा रहती है कि ये विषय कोई भी पढ़ा लेगा। प्रश्न- पत्र में भी ऐसे प्रश्नों की उपेक्षा होती है।संस्कृत के पठन-पाठन की तो घोर उपेक्षा है। जब बहू देखने जाओ और बहू देखने को न मिले तो बहू की माँ और मौसी से बात करो लक्षण पता चल जायेंगे। तो बिना संस्कृत के उद्धार के हिन्दी खिचड़ी व कूड़ा-करकट वाली ही रहेगी। यहाँ आज के दैनिक जागरण हरदोई में समाचार देखिये। यह तब है जबकि केंद्र से लेकर राज्य तक बीजेपी की सरकार है जिसे भारतीय संस्कृति का रक्षक समझा जा रहा है। क्या नई-शिक्षा नीति में इन विद्यालयों के उद्धार की कोई योजना है? जी बिल्कुल नहीं।
 



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घन घने








हम धरा की प्यास हरने आ गये हैं।
कृषकजन-संत्रास हरने आ गये हैं।
भर लिये हैं सागरों से कोष अपने,
नभ चढ़े परिहास करने आ गये हैं।
घन घने हम, गहन उर में ले रहस्य,
जगत में उल्लास भरने आ गये हैं।
वन, भवन, पथ, रथ, उदधि, नग,
हर किसी में श्वास धरने आ गये हैं।








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