सोमवार, 3 जून 2019

प्रेम

एक अनकही अकविता

प्रेम,
बात ही न करो,
कभी किया नहीं।
हृदय की संसद,
सत्र दर सत्र,
बजट पास हुआ नहीं।
हताश हुआ नहीं।
प्रेम,
आज भी,
जेहन में है।
जमीन से,
दूर बहुत दूर।
प्रेम,
शिखर से उतरा,
खोह में विलीन हुआ।
मैं और रेगिस्तान,
अपनी जगह पर हैं।
प्रेम,
अब स्वप्न है,
जागूँगा,
टूट जायेगा।

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शुक्रवार, 31 मई 2019

एफबी

तुम भी एफबी पर आये हो वे भी एफबी पर आयीं।
तुम तो असली ले आये पर फेक आईडी वो लायीं।
तुम क्या समझे शाम को मैडम क्योंकर उखड़ीं उखड़ीं थीं,
उसी आईडी के परदे से तुमको ठीक परख पायीं।।
एफबी-फेसबुक

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बुधवार, 29 मई 2019

दिल से दिल

दिल से दिल की बात करी, और  चल दिये।
मन में न कोई प्रश्न था, पर उसने हल दिये।।1।।
चढ़कर चिराग हुस्न का रक्खा मुंडेर पर,
जालिम को खबर ना हुई, कैसे कतल किये।।2।।
तुम भी तो एक रोज गए थे उसी डगर,
पत्थर तुम्हें कहा क्या, तुम तो पिघल लिये।।3।।
सब कुछ बजार में मुझे मन का मिला नहीं,
जिन्दा रहा हूँ इसलिये अबतक गरल पिये।।4।।
माना कि दूर लगती है सूरज की रोशनी,
पर ज्येष्ठ का महीना, तन मन विकल किये।।5।।
यह प्रेम की कमाई कोई नौकरी नहीं है,
अब तक वसन सिये जो उज्ज्वल 'विमल' सिये।।6।।


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विश्वास रहे

तुमको चाहते हैं अहसास रहे।
तू दूर रह सके या फिर पास रहे।
मर गया होगा तू दुनिया के वास्ते,
दिल में हमारे जी रहा विश्वास रहे।।

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हमारीवाणी

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