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गुरुवार, 4 जनवरी 2018

बुरहानपुर



यह स्थल महाराष्ट्र में ताप्ती नदी के किनारे है| इसे 14वीं शताब्दी में खानदेश के फारूकी वंश के सुल्तान मलिक अहमद के पुत्र द्वारा बसाया गया और अपनी राजधानी बनाया गया| खानदेश के सुल्तान बुरहानुद्दीन वली के नाम पर इसका नामकरण किया गया| 1599 में यह अकबर के अधिकार में अधिक समृद्ध हो गया| इस नगर को मराठों ने कई बार लूटा| यहीं शाहजहाँ की बेगम मुमताज महल की मृत्यु हो गयी थी| 




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कोटा



कोटा शहर राजस्थान में चम्बल नदी के किनारे स्थित है वर्तमान में अपने कोचिंग इंस्टीट्यूट्स के कारण जाना जाता है| किसी समय अकेलगढ़ के नाम से जाना जाता था| यह नगर 1274 से 1624 तक करीब साढ़े तीन सौ वर्षों तक हाड़ा शासकों के अधीन रहा| 1624 में बूँदी के शासक रावरतन के पुत्र माधोसिंह को कोटा का पहला राजा बनाया गया| 1631 में मुगल सम्राट शाहजहाँ के द्वारा एक शाही फरमान जारी करके इसे अलग राज्य की मान्यता प्रदान कर दी| राव दुर्जन के शासनकाल में यहाँ मराठों ने अपना सिक्का जमाया| मराठों से छुटकारा पाने के लिए 1817 में कोटा के महाराज उम्मेद सिंह ने अंग्रेजों से संधि कर ली| अंग्रेजों से संधि करने वाला राजस्थान का प्रथम राज्य था| 






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