राजनीति के फंद में, बोला
माँ से पूत।
मेरे बप्पा वही हैं, दीजै
मुझे सबूत।।1||
कोई चौकीदार है और कोई
है चोर।
घुला चुनावी रंग है रहे
परस्पर बोर।।2||
चौकीदारी करो या या फिर
बेचो चाय।
जब तक वोटर नासमझ, कमी
मौज में नाय।।3||
गहरी नदी चुनाव की, बड़ी
तेज है धार।
हाथी सायकिल पर चढ़ा, कैसे
होगा पार।।4||
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