रविवार, 14 दिसंबर 2025

करतार

यों ही नहीं कहते उसे करतार हम।
हर ओर उसकी देखते सरकार हम।।
हमने लगाये पुष्प पादप श्रम किया,
हैं देखते उनपर खिली तलवार हम।।
जब भी लगा हर रास्ता अब बन्द है,
खुद हो गये हैं आप ही से पार हम।।
क्या कर्म था क्या फल मिला किसको पता,
हर हानि का उस पर रखेंगे भार हम।।
ज्यादा कभी तो कम कभी अनुमान से,
मजबूत भी तो फिर कभी लाचार हम।।

मंगलवार, 9 दिसंबर 2025

जड़ को भूल गया

या तो मैं ही उधर न गुजरा, जिधर टिका मधुमास रहा।
या फिर मेरे मन आंगन को, मधु बसंत ही भूल गया।।
यह संभव है निज कविता में, झूठा प्रेम उड़ेल दिया।
उर का कोई कोमल पन्ना, अनजाने में ठेल दिया।
सत्य यही है मुख मुस्काता, मैं मुस्काना भूल गया।।
रत्न रहे होंगे तलछट में, लेकिन मैं कंजूस रहा।
दान नहीं कर पाया बिल्कुल, मैं किंचित मायूस रहा।
दूर रह गया लेन देन से, जीवन रस को भूल गया।। 
अपने दुर्गुण आगे करके, जग को केवल दर्द दिया।
सम्बन्धों की गर्माहट को, अवसर पाकर सर्द किया।
शाखें पत्ते गिने फूल फल, लेकिन जड़ को भूल गया।।

गुरुवार, 4 दिसंबर 2025

रजगंध पियारी

कैमी का छाॅंड़ि पिहानी बसे हम छॉंड़ि पिहानी बसे हैं अयारी।
पात की भाॅंति उड़ाति फिरे हम धाइ गये जित धाई बयारी।
भावी की बात विधाता को ज्ञात है जाने कहॉं अब होइ तैयारी।
बालपने जेहि भूमि फिरे वही गॉंव-गली-रजगंध पियारी।।
कैमी व अयारी- हरदोई जनपद के गाॅंव
पिहानी - हरदोई जनपद का नगर

भगवानहु ऐहै

काहे को मान गुमान करौं यदि मान गयो अपमानहु जैहै।
आजु भई जो भली या बुरी जेहि गारी दयी जयगानहु गैहै।
शीश पे हाथ धरे करौ सोच न साॅंझि भई तौ विहानहु ह्वैहै।
द्वेष  तजौ   उर  नेह धरौ  उर  नेह   धरे भगवानहु ऐहै।

हमारीवाणी

www.hamarivani.com
www.blogvarta.com