गुरुवार, 6 अक्तूबर 2011

आज सुबह

. आज सुबह
आज सुबह कुछ नई नवेली]
दुल्हन सी सकुचाती आई।
नील गगन पर रौनक छाई]
जन जन को हर्षाती आई।
पक्षी चहके चीं चीं करके]
पेड़ों पर दीवाली छाई।


२. आसान
कम साथ में जितना सामान होगा सफर आपका उतना आसान होगा]
न बोरी न बिस्तर न खाना न कपड़ा तो फिर जिन्दगी में काहे का लफड़ा।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें











हमारीवाणी

www.hamarivani.com