रविवार, 30 मई 2021

डिजिटल प्रेम

प्रेम डिजिटल हुआ हम डिजिट हो गए।
ऑनलाइन मजे के विजिट हो गए।।
बॉक्स मेंं कुछ लिखा फिर सफा कर दिया,
कौन जाने कि कितनी दफा कर दिया,
उर प्रफुल्लन कुशल प्रेय सम्वाद को,
हर डिजिट ने सँभाला शिफा कर दिया।।
हम जियेंगे यही सोच मन में रखी,
देख डी पी तुरत जां-ब-हक हो गए।
प्रेम डिजिटल हुआ हम डिजिट हो गए।
ऑनलाइन मजे के विजिट हो गए।।1।।
भय मिटा और चिन्ता हरी फोन ने,
मौन रह कर कहा हाल रिंगटोन ने,
एक नोटीफिकेशन खुशी दे गया,
ऐसी घुट्टी पिलाई लवर-जोन ने।
छोड़ घर संत होवें जरूरत नहीं,
प्रेम सागर की गहरी लहर हो गए।
प्रेम डिजिटल हुआ हम डिजिट हो गए।
ऑनलाइन मजे के विजिट हो गए।।2।।
अंक का क्षीर सागर न अधरों छुआ,
माँगते रह गए विष-घटों से दुआ,
मायानगरी ने नेट की ठगा इस तरह,
प्यास से मर गई वृद्ध मेरी बुआ*। 
टिप्पणी लाइकों के शिखर पर चढे़,
गृह-सदस्यों के मन की चुभन हो गए।
प्रेम डिजिटल हुआ हम डिजिट हो गए।
ऑनलाइन मजे के विजिट हो गए।।3।।

*(मैं जब प्रेम की बात करता हूँ तो समझता हूँ माँ के बाद दो ही रिश्ते प्रगाढ़ होते हैं एक बुआ और दूसरी मौसी)


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