सोमवार, 19 अगस्त 2024

मजा लीजिये

आज के आज मत सब मजा लीजिए,
कुछ को कल की भी खातिर बचा लीजिए।
एड़ियों में महावर लगा दूॅंगा कल,
आज आकर के मेंहदी रचा लीजिए।
कान की बालियॉं चूमतीं गालों को,
हैं जलातीं मुझे ये हटा लीजिए।
कब्र में पैर लटका के बैठे हो जो,
उर में मोहन की मूरत बसा लीजिए।
चाहते हाथ में हों अमृत के घड़े,
नफरतों से हृदय को हटा लीजिए।
है तुम्हारा भी स्वागत चले आइए,
हाथ में किन्तु सच की ध्वजा लीजिए।

शुक्रवार, 26 अप्रैल 2024

विरह वेदना

ना पिय पाये न पायी पाती।
सावन माह जल रही छाती।
खेत खेत बिखरी हरियाली,
हृदय  मरुस्थल बिछुड़न व्याली।।1।।
तन तृण विरस ज्वलन हित तत्पर।
प्राण प्रयाण चाहते सत्वर।
दोनों अपनी गति पा जाते,
प्रिय दर्शन को ठहरे हठकर।।2।।
दुरभिसंधि है अनिल अनल की।
दिखे न पीड़ा उर में छलकी।
नयन नीर का कोष शून्य है,
पलकें चाह करें एक पल की।।3।।

रविवार, 10 मार्च 2024

दिग्विजेता


उर दिया है नेह घृत है,
और जीवन वर्तिका।
दीप क्षण क्षण जल रहा है,
विश्व में सत को समर्पित।
पथ सुचिंतित पग सुचिंतित,
प्रेय भी है श्रेय भी।
मनुज भी मैं मनज भी मैं,
प्यास मैं ही मैं पयस्।
पथ पथी गन्तव्य गति सब,
हो गये हैं एक रॅंग।
और मैं संग में तुम्हारे,
दिग्विजेता समर-ध्वज।

शनिवार, 2 मार्च 2024

मन की कर ले

कदरदान तो आयेंगे ही बाकी को फुर्सत न मिलेगी।
जहॉं जमेंगे पीने वाले साकी को फुर्सत न मिलेगी।।
तेरे हित में ये अच्छा है मन की कर ले इस महफिल में,
ओ रक्कासा! यहॉं से जाकर अन्य कहीं इज्जत न मिलेगी।।
नीचे गिरना जल छोंड़े तो प्यासे सब मर जायेंगे,
आग अगर नीचे गिर जाये धरती पर जन्नत न मिलेगी।
मेरी पुस्तक के ग्राहक हैं चूहे, दीमक, चूरन वाले,
मुझे पता है छपवा भी दूॅं कविता की कीमत न मिलेगी।
जिससे जो भी मिली नसीहत सबकी सब मेमोरी में,
जो भी चाहे सब ले जाये बार बार मोहलत न मिलेगी।

हमारीवाणी

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