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शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

ऐहोल


यह स्थान कर्नाटक के बीजापुर जिले में बादामी के पास है| यहाँ से 634 ईस्वी का नरेश पुलकेशिन द्वितीय का एक अभिलेख प्राप्त हुआ है जिसे संस्कृत में जैन कवि रविकीर्ति ने लिखा है| इसमें पुलकेशिन द्वितीय के हांथों हर्षवर्धन की पराजय का वर्णन है| ऐहोल को “मन्दिरों का नगर” भी कहा जाता है| ऐहोल के चालुक्य कालीन मन्दिरों में लाड़खान मन्दिर, दुर्गा मन्दिर और ह्च्चीमल्ली गुड्डी मन्दिर विशेष उल्लेखनीय है| लाड़खान मन्दिर 450 ईस्वी में बने हुए गुफा मन्दिरों की तरह का है| यह मन्दिर बौद्ध चैत्य को ब्राह्मण धर्म के मन्दिर के रूप में उपयोग में लाने का प्रयोग है| इसका ढांचा अर्द्धवृत्ताकार है| यहाँ का मेगुत्ति का जैन मन्दिर भी प्रसिद्ध है|




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मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

वल्लभी


यह स्थल गुजरात में है| यह स्थान प्राचीनकाल में शिक्षा, धर्म एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध रहा है| इसी स्थल पर द्वितीय बौद्ध संगीति हुई थी| गुप्तोत्तरकाल में यहाँ मैत्रक वंश का शासन रहा| हर्षवर्धन ने अपनी पुत्री का विवाह यहाँ के शासक ध्रुवसेन से किया था| यहाँ से पश्चिमी देशों से व्यापार भी नियन्त्रित होता था| जैन अनुश्रुति के अनुसार जैन धर्म की एक परिषद छठीं शताब्दी में वल्लभी में हुई थी, जिसके अध्यक्ष देवर्धिगण नामक आचार्य थे| यहाँ एक विश्वविद्यालय भी था जिसे 7वीं सदी में नालन्दा के समान ख्याति प्राप्त थी| यहाँ राजकुमारी टिड्डा व धरसेन द्वारा विहार बनवाये गये| आचार्य स्थिरमति व गुणमति यहाँ के आचार्य थे| यहाँ तर्क, व्याकरण, व्यवहार व साहित्य की शिक्षा दी जाती थी| 770 में इसे अरबों द्वारा नष्ट कर दिया था|


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