फेविकोल का वादा था फिर हाथ हथौड़ा थामा क्यों?
जातिवाद का पहन पजामा बन बैठे हो मामा क्यों?
जिनका दामन पकड़ युगों से सिंहासन के सिंह दहाड़े,
उनके बच्चों की खातिर तुम भूल गये निज जामा क्यों?
तुमने चल दी चाल चाल का प्रतिउत्तर एक चक्रव्यूह है,
तुमको तो दक्षिण चलना था चल बैठे हो वामा क्यों?
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मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026
जातिवाद
बुधवार, 7 जनवरी 2026
रजाई में
तन मन कॉंपा, ठंड बढ़ गयी, सूरज छिपा रजाई में।
कुहरा, बादल, शीत मिल गये,बिक गये अक्षर ढाई में।
गर्म श्वास की, चाह चढ़ गयी, बढ़ गयी प्रीति लोनाई में।
खुल खुल खॉंसें, बुढ़ऊ घर में, मर गयी मौज दवाई में।।
शुक्रवार, 2 जनवरी 2026
शीत के शासन
शीत की रीति है प्रीति जमे वहीं आग जले गरमाई मिले यदि।
शून्य भई मति कम्पन अंग में संग फले मनभाई मिले यदि।
स्वर्ग की चाह न मोक्ष का मोह न नेह उढ़ायी रजाई मिले यदि।
शुक्ल कहें सुख शीत के शासन अंक समायी लुगाई मिले यदि।
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