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शनिवार, 3 मार्च 2018

होली पर कुछ रंग


होली पर कुछ रंग,
मेरी कलम से बिना भंग|

विजय माल्या से लिया, जिन असली संदेश।
नीरव मोदी खेलि के, होली भगे विदेश।।
पी एन बी के हाथ, लगी खाली पिचकारी।।1।।
राहुल बाबा ने रखी, सब नातिन की लाज।
नानी के घर खेलने, पहुंचे होली आज।।
सत्ता तौ गयी छूटि, कहाँ बैठें सत्तारी।।2।।
खांसी अब आती नहीं, मफलर हुई गयो तंग।
इस होली में भी नहीं, जमा सके हैं रंग।।
भ्रमित केजरीवाल दिख रहे निपट अनारी।।3।।
'विमल'


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गुरुवार, 24 मार्च 2016

होली का त्यौहार है


अम्मा बड़ी हताश हैं पप्पू बहुत उदास।

सत्ता का घोड़ा छुटा, छुटी हाथ से रास।।

रंग बदरंग हो गये।

खोपड़े तंग हो गये।।

जनाधार को खिसकता देख रहे अखितेश।

अफसर भुगतेंगे अगर हार गये वह रेस।।

नतीजा जो भी आये।

हिले कुर्सी के पाये।।

अनुमानों की रेस में हाथी का है क्रेज।

बीजेपी भी धार से लगती है लबरेज।।

पास आया सन सत्रह।

कांग्रेस करे दुराग्रह।।

पगड़ी वाले छुटे तो मिले केजरीवाल।

गठे चुटकुले इस तरह बन गयी एक मिसाल।।

फंसे हैं ऑड इवेन में।

बसे हर दल के मन में।

लालू और नितीश की खिचड़ी बड़ी कमाल।

धरी रही मैनेजरी उतर गयी सब खाल।।

अमित जी कला खा गये।

विरोधी किला पा गये।।

होली देहरादून में रंगीली इस बार।

रंग चले कुछ इस तरह संकट में सरकार।।

वेवफा कुर्सी भइया।

डुबाये किसकी नैया।।

अन्ना जी खामोश हैं रामदेव वाचाल।

टीवी पर वह बेचते तरह तरह का माल।।

लगा मैगी पर ताला।

योग संग बिके मशाला।।

रँग जेएनयू में बंटे लिए बाल्टी आव।

देशद्रोह से पगे हैं गुझिया पापड़ खाव।।

राहुल जी के मन भाए।

कन्हैया घर हो आये।।

होली का त्यौहार है मेलजोल की रस्म।

उर की कटुता आज से होनी चाहिय भस्म।।

प्रेम की जय जय बोलो।

कर्म में मिश्री घोलो।।

शुक्रवार, 6 मार्च 2015

झाड़ू चुराने वाले

06/03/2015
झाड़ू चुराने वाले क्या तेरे मन में समाई,
काहे को झाडू चुराई।
तूने काहे को झाडू चुराई।
कैसे ये ठोंकी ताल दिल्ली में जाके।
क्या पाया तूने केजरीवाल को चिढ़ा के।
बत्तीस थीं सीटें तेरी तीन ही बचाईं।
फौजें भी भारी भरकम जीत को लगाईं।
सत्ता में होकर तेरी, झाड़ू की चलवाई।
काहे को झाडू चुराई तूने काहे को झाडू चुराई।

तू भी तो तडपा होगा झाड़ू को चुराकर।
वो भी तो तडपा होगा झाड़ू को गवांकर।
दोनों के मन में समाई दिल्ली की गद्दी।
एक के अरमान तो होने थे रद्दी।
बोल क्या सूझी तुझको काहे को टांग तुड़ाई।
काहे को झाड़ू चुराई, तूने काहे को झाड़ू चुराई।

बेदी को आगे करके लड़ना सिखाया।
लड़ना सिखाया हार गिरना सिखाया।
सत्ता के पथ के तूने फूल समेटे।
फूल समेटे तूने कांटे समेटे।
सपना जगा के तूने, वेदी को दे दी विदाई।
काहे को झाड़ू चुराई,
तूने काहे को झाड़ू चुराई।
बुरा न मानो होली है।...... @विमल कुमार शुक्ल'विमल'

सोमवार, 17 मार्च 2014

होली में

बड़ी सुन्दर सजी चौपाल है इस साल होली में।
केसरिया रंगे मोदी से सजी है थाल होली में।
बने सरकार जिसकी भी न कोई फर्क है प्यारे।
मुझे अच्छा लगा हुड़दंगे केजरीवाल होली में ।
बहुत मायूस है बेटा बुझी सी दिख रही है माँ।
तिबारा है नहीं दिखती गलेगी दाल होली में।
जो नेता तीसरे मोर्चे की बातों में भ्रमाये हैं।
उसी घर जायेंगे जिस ओर हो तर माल होली में।
बुढ़ापे में लगाया रंग अन्ना ने वो दीदी को।
अंगूठा देखकर ममता हुई हैं लाल होली में।
लिए लालटेन को लालू टटोलति रास्ता आवें।
कहाँ फेकैं समझ आवै न अपना जाल होली में।
नहीं मैं बात माया की करूंगा इस समय कुछ भी।
बहाली तन से हाथी की है बदली चाल होली में।
मुलायम ने समझ रक्खा है पब्लिक को गधा उल्लू।
लगाई लाल को है डांट ढाई साल होली में।
बहुत ज्यादा नहीं कहना अरे वोटर सम्भल जाओ।
तुम्हारा वोट है तलवार कर दो काल होली में।
ये ई वी एम् है पिचकारी बहुत रंग के बटन इसमें।
जो रुचता हो करो रंगीन उसके गाल होली में।

हमारीवाणी

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