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मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

जल बचाइए

फेसबुक पर एक बन्धु सुझाव दे रहे थे कि जाड़ा बहुत है जल बचाइए और संडे के संडे नहाइये तो मेरे मन में कुछ भाव उठे और फटाफट व्यक्त हो गये। आनंद लें।

संडे को नहाया तो भी खर्च होगा ज्यादा जल,
हो सके तो एक बार माह में नहाइये।
बोतल में पानी भर रख लो कबर्ड में,
हन्नू हन्नू कह कर शीष पे घुमाइये।
दिख जाये कोई अन्य भी जो नहाता हुआ,
खुद ही नहा लिये हैं मन में मनाइये।
जन्म जब हुआ था तो नहला दिया था नर्स ने,
एक इसी स्मृति से काम को चलाइये।

सोमवार, 28 अप्रैल 2025

ले गया

कोई बल के घमण्ड, छीन के प्रचण्ड हुआ,
कोई हो विनम्र हाथ जोड़ मॉंग ले गया।
जो भी कहें होशियार, चालबाज, कपटी या,
रहा धंधेबाज झूठ सॉंच धॉंग ले गया।
कोई दीन-हीन बना, द्रवित हृदय छना,
करों को प्रसार दान झोली टॉंग ले गया।
जो भी जिस योग्य रहा उसी भाॅंति ले गया वो,
अपनी ही ले गया न मेरी भॉंग ले गया।।

रविवार, 1 सितंबर 2024

चौथी बार खा ही लेंगे

कमनीय काया की प्रशंसा किये बिना बढ़े,
दुष्ट ध्यान भी न देता कह के चिढ़ायेंगी।
जिनको लड़ाने नैन नैन वो लड़ायेंगी ही,
आपसे न टाॅंका भिड़े बाप से भिड़ायेंगी।
कहॉं तक संयम की ध्वजा को उठाया जाये,
सावधान हो के राष्ट्रगान नहीं गायेंगी।
एक बार दो बार तीन बार छोड़ देंगे,
चौथी बार खा ही लेंगे खीर जो बढ़ायेंगी।।

रविवार, 11 फ़रवरी 2024

कॅंटीली औ' कटीली

कॅंटीली औ' कटीली का जो फर्क नहीं जानते हैं,
तर्क वही करते अर्क रेत से निकालते।
चाहते हैं मधुपर्क करना न चाहें वर्क,
तन खाये जर्क खाल बाल से निकालते।
जैसे कर्क कर्क की ही टॉंग खींच ग़र्क करें
बेड़ा, निज जाति का जनाजा ही निकालते।
बुद्धिमान वही हैं जो रार नहीं ठानते हैं,
झोंकते हैं हॉं में हॉं ही ना में ना निकालते।

शनिवार, 27 मई 2023

चाहते जो फायदा

वैद्य का बतावै परी, भीर जौन आय परी,
तबै जी मा चैन परी, हेकड़ी तो न चली।
साँची जो बतैहौ नाइ, दवा ठीक पैहौ नाइ, 
ईश न करी सहाइ, जान जाइ न चली।
चाहते जो फायदा तउ सीखि लेउ कायदा,
तुमसे जो ज्ञानी होय हेरफेर न चली।
बात यहै एक भली बनौ नहीं बाहुबली, 
जैसे कहै उठौ बैठो मनमौज न चली ।।

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2022

चन्द्र

एक चन्द्र नभ राजे, दूजो चन्द्र मुख चन्द्र,
तीजो चन्द्र माँगबेंदी माथ पे दिखानो है।
चौथो चन्द्र पतिदेव सामने जो दीख गए,
करवा में चार चन्द्र मन अनुमानो है।
कौन वालो चन्द्र तुम्हें पूजनो है चन्द्रमुखे!
बार बार यही प्रश्न चित्त उमड़ानो है।
सरल सुभाय किन्तु वाणी में वणिक सी,
बोल पड़ी भानुमती, राज ही छिपानो है।।

साथ ही जिन क्षेत्रों में चन्द्रमा आज दिखाई नहीं पड़ रहा है, उस क्षेत्र की बहनों के लिए अतिरिक्त पंक्ति

रूप लखि चन्द्रमुखिन चन्द्रमा लजाइ के,
सामने न आवे मेघ मध्य जा लुकानो है।।

मंगलवार, 23 मार्च 2021

फटी हुई जीन्स

फटी हुई जीन्स की आलोचना न करें बन्धु,
हो सके तो सही वेशभूषा को सम्मान दें।
कुतियों के भौंकने पर कान बन्धु देते क्यों,
कोयलों के गुणगान वाला आसमान दें।
कोयले के नाम से काली छवि बने मन,
मन को तो क्षीरसिन्धु का ही ज्ञान-ध्यान दें।
भृष्ट-जन-चिंतन से भृष्टता ही आती तन,
मन में न राम यदि रमा को स्थान दें।।


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गुरुवार, 23 जुलाई 2020

निषिद्ध है

डाँट और मार फटकार नहीं सकते हैं,
बालकों पे अत्याचार करना निषिद्ध है।
प्रेम और पुचकार नीयत के प्रश्न बन्धु,
गोद में उठा के प्यार करना निषिद्ध है।
बठिया नहीं हूँ बन्धु मेरे दिल दिमाग है,
होके उदासीन पार करना निषिद्ध है।
आज के समाज की है दशा ही विचित्र मित्र,
शंकाहीन व्यवहार करना निषिद्ध है।

मंगलवार, 16 जून 2020

गोरी या काली

टकले भी चाहते हैं चाँद पे प्रकाश बढ़े,
खिले मुखमंडल पे चाँदनी श्रृंगार की।
कोई नवयुवती जो हिये प्रेम धारे हो,
आये अब सँवार दे जिन्दगी उधार की।
मन के महल बीच कम्पनों का वेग बढ़ा,
चाहता हिलाना नींव, प्रीति के पहाड़ की।
यूपी को जो मिले नही, तो भी कोई बात नहीं, 
काली हो या गोरी होय, बंग या बिहार की।।

शुक्रवार, 23 मार्च 2018

मुझे जाँच लीजिये



भागने की कला में प्रवीण पैदाइशी हूँ,
जब चाहे मुझे आजमाके देख लीजिये|
छोड़ पाठशाला कई बार भाग आया घर,
टीचरों से मेरे स्वर्ग जाके पूछ लीजिये|
छिपता था ऐसी जगह ढूँढ़ हारते थे मित्र,
कहते थे इसे कभी खेल में न लीजिये|
अरे! बैंक वाले मित्र हो जाएगा विश्वास,
एक बार कर्ज देके मुझे जाँच लीजिये|
 




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गुरुवार, 25 जनवरी 2018

सत्य



आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा से जो जाना जाए,
वही सत्य होता नहीं मित्र जान लीजिये।
अंतर में ईश के प्रकाश प्रेरणा से मित्र,
कभी कभी खिले ये प्रसून मान लीजिये।
गूलर का फूल तो दिखाई नहीं देता किन्तु,
बीज से ही वृक्ष होने का प्रमाण लीजिये।
संतों की वाणी में विवाद ढूंढ़ने से पूर्व,
झाँक मित्र कभी निज गिरेबान लीजिये।।
 




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गुरुवार, 11 जनवरी 2018

बिजली का करेंट


ड्रेस एक सुन्दर सी बाल हों सजीले बन्धु,
गमछे पर डालने को सेंट होना चाहिये|
पैरों में भूरे रंग की स्लीपरें हो हल्की सी,
खद्दर के कुर्ते पर पैंट होना चाहिये|
आँखों पे ऐनक हो नाक पर खिसके जो,
पान रंगे होंठ परमानेंट होना चाहिये|
डायस पे डायरी या हाँथ में हो पुर्जी एक,
कविता में बिजली का करेंट होना चाहिए|
 



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शनिवार, 24 दिसंबर 2016

पतिंगा और हम

बारि बारि दिया हम, राखे थे मुंडेर पर,

करिहैं जो उजाला तौ, जीव हित होई।

किन्तु जो पतिंगा रहे, धाइ धाइ ज्वाला धंसे,

देखि पंख मूड़ जरे, गयो चित रोई।

पग पग पुंगा लोग, कौशल का ठेका लिए,

विद्वता के बीज रहे, पुलकित बोई।

हमहूँ प्रतिज्ञा करी, तन जान रहे धरी,

छोड़िबो न धर्म निज, करै कित कोई।।

रविवार, 19 जनवरी 2014

बिको जाति है

गाँव से शहर गओ गोरी के प्रेम पगो,
बीबी का बताई गओ बिजनेस का जाति है।
रोज रोज फोन करि घर मा बताई देइ,
जल्दी लौटि अइबो कुछु सौदा रहो जाति है।
एक दिन जानि गई राजु सबु सौदा करो |
कौनु कामु करति मियाँ हियो फटो जाति है|
बीबी रही समझदार एक दिन बोली मियाँ,
जो तुम खरीदति हुआं हियाँ बिको जाति है।

शनिवार, 30 मार्च 2013

द्वारिकेश



धाये धन-धाम छोड़ द्वारिका के नाथ कभी,
द्रौपदी की आन मान क्षण में बचाने को।
सुना ज्यों सुदामा मित्र द्वारिकेश द्वार खड़े,
दौड़ चले उठकर मित्रता निभाने को।
प्रण छोड़ चक्रधर धाये गंगापुत्र पर,
कुन्तिजात युद्धवीर जीवन बचाने को।
ऐसे भक्त प्रेमी भगवान को न ध्याये नित्य,
भार रूप भूमि पर जीवन बिताने को।

मंगलवार, 27 दिसंबर 2011

पिहानी


प्राणों से प्यारी ये पिहानी की पवित्र भूमि,
जन्मभूमि श्याम रँग राँचे रसखान की।
कभी जो दमिश्के अवध नाम से विख्यात रही,
नहीं मोहताज है ये झूठे गुणगान की।
छाते मशहूर किसी काल में पिहानी के थे;
वीरों में प्रसिद्धि थी तेगों की शान की।
आजकल की दोषपूर्ण राजनीति से बची,
एक है पिहानी अभी हिन्दू मुसलमान की।

हमारीवाणी

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