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सोमवार, 19 अगस्त 2024

मजा लीजिये

आज के आज मत सब मजा लीजिए,
कुछ को कल की भी खातिर बचा लीजिए।
एड़ियों में महावर लगा दूॅंगा कल,
आज आकर के मेंहदी रचा लीजिए।
कान की बालियॉं चूमतीं गालों को,
हैं जलातीं मुझे ये हटा लीजिए।
कब्र में पैर लटका के बैठे हो जो,
उर में मोहन की मूरत बसा लीजिए।
चाहते हाथ में हों अमृत के घड़े,
नफरतों से हृदय को हटा लीजिए।
है तुम्हारा भी स्वागत चले आइए,
हाथ में किन्तु सच की ध्वजा लीजिए।

शुक्रवार, 15 सितंबर 2023

अगर तुम पास आ जाओ

लगी है हाट जब सुन्दर तो कुछ तो क्रीत हो जाये।
उठो दौड़ो करो जल्दी न इच्छा शीत हो जाये।।
जहॉं निर्मल हृदय होगा अहम् से दूरियॉं होंगी।
सुकोमल मन मिले कोई न चाहे प्रीत हो जाये।।
हृदय का मूल्य वे देंगे स्वयं समृद्ध जो उर से,
सॅंभल कर कीजिये सौदा नहीं अनरीत हो जाये।।
न समझूॅं स्वर न जानूॅं लय विकल मैं रागिनी खोजूॅं।
अगर तुम पास आ जाओ तो फिर से गीत हो जाये।।
करूॅं साधन कहाॅं कितना यही आकर बता जाओ।
कठिन हो कर्म कितना भी सरलतम जीत हो जाये।।

रविवार, 10 सितंबर 2023

कुविचारों की धूल छंटा दे

21/02/2017

चाहे जो इल्जाम सटा दे।
लिस्ट से मेरा नाम हटा दे।
तेरी हर हाँ पर हाँ कर दूँ,
अपने वश की बात नहीं है।
झूठ पे अपना नख ना काटूँ,
सच पर मैं जो शीश कटा दे।
क्या है प्रगति मनुज से पशु में,
अपनी समझ नहीं आता है,
जंगल से शहरों तक पथ पर,
कुविचारों की धूल छंटा दे।
अपनी छत अपनी दीवारें,
करने में षडयन्त्र जुटी हैं।
मुझ पर जो विश्वास नहीं है,
तो प्राणों का भाव घटा दे।


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गुरुवार, 28 जनवरी 2021

उर में उठती पीर

मिट्टी खाई गिट्टी खाई , खा डाली सीमेंट याद है।
गए पोतने दीवारों को , चेहरे पर की पेंट याद है।।1।।
डाली पर दो बन्दर बैठे, मुझको ढँग से ताक रहे थे,
गड्ढा खोद गिटैली रख के, ढक दी थी वो गेंद याद है।।2।।
बहुत बार शैतानी करके, बच जाते थे कभी कभी हम,
लेकिन फँसे सजा पाई जब, खूब दुखी थी पीठ याद है।।3।।
भरी दोपहर छुक छुक करती, जिसके नीचे रेल चली थी,
बच्चों के मन भाने वाला, वो पीपल का पेड़ याद है।।4।।
विदा हुई जब काली कोयल, पीछे पीछे दौड़ रहा था,
ठोकर खाकर गिरा जहाँ पर, वहाँ पड़ी थी ईंट याद है।।5।।
था जिस दिन स्कूल आखिरी, छूट गया कुछ बहुत कीमती,
अंकपत्र दे ठगा गया था, उर में उठती पीर याद है।।6।।

सोमवार, 17 मार्च 2014

होली में

बड़ी सुन्दर सजी चौपाल है इस साल होली में।
केसरिया रंगे मोदी से सजी है थाल होली में।
बने सरकार जिसकी भी न कोई फर्क है प्यारे।
मुझे अच्छा लगा हुड़दंगे केजरीवाल होली में ।
बहुत मायूस है बेटा बुझी सी दिख रही है माँ।
तिबारा है नहीं दिखती गलेगी दाल होली में।
जो नेता तीसरे मोर्चे की बातों में भ्रमाये हैं।
उसी घर जायेंगे जिस ओर हो तर माल होली में।
बुढ़ापे में लगाया रंग अन्ना ने वो दीदी को।
अंगूठा देखकर ममता हुई हैं लाल होली में।
लिए लालटेन को लालू टटोलति रास्ता आवें।
कहाँ फेकैं समझ आवै न अपना जाल होली में।
नहीं मैं बात माया की करूंगा इस समय कुछ भी।
बहाली तन से हाथी की है बदली चाल होली में।
मुलायम ने समझ रक्खा है पब्लिक को गधा उल्लू।
लगाई लाल को है डांट ढाई साल होली में।
बहुत ज्यादा नहीं कहना अरे वोटर सम्भल जाओ।
तुम्हारा वोट है तलवार कर दो काल होली में।
ये ई वी एम् है पिचकारी बहुत रंग के बटन इसमें।
जो रुचता हो करो रंगीन उसके गाल होली में।

हमारीवाणी

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