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गुरुवार, 24 मार्च 2016

होली का त्यौहार है


अम्मा बड़ी हताश हैं पप्पू बहुत उदास।

सत्ता का घोड़ा छुटा, छुटी हाथ से रास।।

रंग बदरंग हो गये।

खोपड़े तंग हो गये।।

जनाधार को खिसकता देख रहे अखितेश।

अफसर भुगतेंगे अगर हार गये वह रेस।।

नतीजा जो भी आये।

हिले कुर्सी के पाये।।

अनुमानों की रेस में हाथी का है क्रेज।

बीजेपी भी धार से लगती है लबरेज।।

पास आया सन सत्रह।

कांग्रेस करे दुराग्रह।।

पगड़ी वाले छुटे तो मिले केजरीवाल।

गठे चुटकुले इस तरह बन गयी एक मिसाल।।

फंसे हैं ऑड इवेन में।

बसे हर दल के मन में।

लालू और नितीश की खिचड़ी बड़ी कमाल।

धरी रही मैनेजरी उतर गयी सब खाल।।

अमित जी कला खा गये।

विरोधी किला पा गये।।

होली देहरादून में रंगीली इस बार।

रंग चले कुछ इस तरह संकट में सरकार।।

वेवफा कुर्सी भइया।

डुबाये किसकी नैया।।

अन्ना जी खामोश हैं रामदेव वाचाल।

टीवी पर वह बेचते तरह तरह का माल।।

लगा मैगी पर ताला।

योग संग बिके मशाला।।

रँग जेएनयू में बंटे लिए बाल्टी आव।

देशद्रोह से पगे हैं गुझिया पापड़ खाव।।

राहुल जी के मन भाए।

कन्हैया घर हो आये।।

होली का त्यौहार है मेलजोल की रस्म।

उर की कटुता आज से होनी चाहिय भस्म।।

प्रेम की जय जय बोलो।

कर्म में मिश्री घोलो।।

गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

अन्ना हजारे


अन्ना जैसे देश में, सौ दो सौ हो जायें।
सत्य मानिये भ्रष्टजन देश छोडकर जायें॥१॥
बूढ़े की हुँकार पर, जागा सारा देश।
भ्रष्ट व्यवस्था से घृणा, जन जन में आवेश॥२॥
अन्ना गाँधी से अधिक, मेरे लिये महान।
गाँधी गैरों से लड़े, वह अपने इन्सान॥३॥
अन्ना तुम युग युग जियो, रहो हमेशा स्वस्थ।
मार्ग दिखाओ लोक को, कभी न करना प्रस्थ॥४॥
लोकपाल हित आपने, किया हठी सन्घर्ष।
भारत का कण कण हुआ,पूर्ण हर्ष उत्कर्ष॥५॥
जन की ताकत चीज क्या किया आपने सिद्ध।
घबराये काँपे बहुत, राजनीति के गिद्ध॥६॥
बूढ़ी हड्डी आपकी, युवकों सा उत्साह।
भूखे रहकर आपने, दी लड़ने की राह॥७॥
गाँधी के हथियार को दिया आपने मान।
जँग लग रही थी वहाँ, रखी आपने शान॥८॥
पुनः आपकी कृपा से , गाँधी के सिद्धान्त।
प्रासंगिक लगने लगे, अब तक जो थे शान्त॥९॥

हमारीवाणी

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