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गुरुवार, 11 मार्च 2021

आग जला लेते हैं

चलो समोसे खा लेते हैं।
इस मन को बहला लेते हैं।
धूप नहीं आई है छत पर,
थोड़ी आग जला लेते हैं।
कहाँ अकेले जाकर घूमूँ,
सोचा तुम्हें बुला लेते हैं।
बहुत पुराना याराना है,
जब तब इसे निभा लेते हैं।
ज्यादातर पैदल चलकर हम,
पर्यावरण बचा लेते हैं।
सेहत है व्यापार हमारा,
जल में दूध मिला लेते हैं।
नाम हमारा छोटा सा है, 
तुझसे जोड़ बढ़ा लेते हैं।




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शनिवार, 29 जून 2019

आग


हमने मेघों से जल माँगा,
सूरज ने बरसाई आग।
दादुर भूल गए टर्राना,
वन उपवन में धाई आग।।

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शनिवार, 13 जनवरी 2018

प्रिये

मत बिस्तर अभी उघाड़ प्रिये, 
हैं काँप रहे सब हाड़ प्रिये|
इतना मत खोल किवाड़ प्रिये, 
है शीती रही दहाड़ प्रिये|
वो देखो पेड़ों की चोटी, 
कुहरे का खड़ा पहाड़ प्रिये|
ये ओला भरी रजाई है, 
या गारे भरा तगाड़ प्रिये|
जो फर्श बर्फ की सिल्ली है, 
इसका कुछ करो जुगाड़ प्रिये|
थोड़ी सी आग जला दो तुम, 
इतना तो कर दो लाड़ प्रिये|





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