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रविवार, 8 सितंबर 2019

चाँद रहेगा

कुछ दिन चाँद रहेगा प्यारे, कवियों की कविताओं में।
एक राष्ट्रनायक का चमचम, कुंजों और लताओं में।
हार-जीत के चर्चे होंगे, टीवी या अखबारों में।
चाहें खुशियाँ चाहें गम हों, रौनक होगी बारों में।
अपने-अपने ढंग से सारे, लगे हुए हैं वाचन में,
लेकिन तय है अपना जलवा, कायम रहा सितारों में।
शंका हो क्या आर्यभट्ट वाराहमिहिर श्रीधर में,
आओ चलकर पूँछे हमसब, चौबिस अवतारों में।



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बुधवार, 30 सितंबर 2015

एक वो है



बन्दा चाँद पर गया है,
वहाँ काम चल रहा है।
किसी मुमताज का ताजमहल,
बन रहा है।
एक वो है जो दोनों जहाँ संभाले है,
मेरा दम तो,
जमीन पर ही निकल रहा है।

बुधवार, 27 मई 2015

कमबख्त पेड़

मुझे पतझड़ का इन्तेजार रहता है।
चाँद तो आज भी उसी खिड़की पर है।
कमबख्त पेड़ है जो उग आया है।
मेरे उसके बीच किसी दीवार की मानिंद।
@विमल कुमार शुक्ल'विमल'

बुधवार, 3 जुलाई 2013

छवि माध्वी

अम्बर से उतरी रजनी तू,
घूंघट घन तो चेहरा चाँद।
प्रेयसि तनिक उजाला कर दे।
रूप राशि दर्शन का वर दे।
छवि माध्वी मन पीने वाला।
छिपा न अपने तन का प्याला।

हमारीवाणी

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