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गुरुवार, 10 सितंबर 2020

मनुआ तेरा खेल

वहीं खत्म हो जाएगा, मनुआ तेरा खेल।
जितनी मात्रा में भरा, प्रभु ने तन में तेल।
प्रभु ने तन में तेल, पूर्ण कर ज्योति दिखा दी।
पल-पल की तस्वीर, भाग्य में फीड करा दी।
फिर भी जब जब मित्र, कर्म प्रबल हो जाएगा।
हर संकट क्षण मात्र, वहीं खत्म हो जाएगा।।

 

 

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गुरुवार, 10 अक्टूबर 2013

बदल गया स्कूल

बाबा कबीर का एक दोहा याद आता है,
"गुरु कुम्हार घट शिष्य है गढ़ गढ़ काढ़इखोट।
अंतर हाथ सहार दइ बाहर दइ दइ चोट ।।"

वक्त बदल गया तो इस दोहे को छोड़िये जनाब और यह कुंडलिया पढ़िये।

"गुरु विक्रेता शिष्य है, क्रेता अति धनवान।
पैसा खींचत गुरु भला, भला न पकड़े कान।
भला न पकड़े कान, कभी अपने शिष्यों का।
देवे भले न ज्ञान, कभी अपने हिस्सों का।
विद्यालय को छोंड़ क्लास ट्यूशन की लेता।
है पैसे की होड़, ज्ञान  का गुरु विक्रेता।।"

हमारीवाणी

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