मंगलवार, 15 जनवरी 2019

टुकड़ा तेरी थाल का


मैं भी बहुत बड़ा कारण हूँ इस जग के जंजाल का,
लाठी लेकर घूम रहा हूँ काम नहीं है बाल का।
बहुत जटिल नक्शे देखे हैं, बहुत बड़ी तामिरें कीं,
सबके पीछे झांक के देखा मसला रोटी दाल का।
अपने अपने हाल की खातिर, हाल तुम्हारा पूछ रहे।
कोई पुरसाहाल नहीं है वरना तेरे हाल का।
किसी विषय का पक्ष करें या फिर विपक्ष में खड़े रहें,
उनका लक्ष्य सिर्फ इतना है टुकड़ा तेरी थाल का।
साँप के जैसे पलटी खाना अब तो सबकी आदत है,
किसका किसका नाम लिखोगे हल ही नहीं सवाल का।
 



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शुक्रवार, 11 जनवरी 2019

चुनावी समर

 इस चुनावी समर का हथियार नया है।
खत्म करना था मगर विस्तार किया है।
जिन्न आरक्षण का एक दिन जाएगा निगल,
फिलहाल इसने सबपे जादू झार दिया है।
अब लगा सवर्ण को भी तुष्ट होना चाहिए।
न्याय की सद्भावना को पुष्ट होना चाहिए।
घूम फिर कर हम वहीं आते हैं बार बार,
सँख्यानुसार पदों को संतुष्ट होना चाहिए।



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रविवार, 30 दिसंबर 2018

जागा भाग्य ऐ! बाले

1. अब सुबह क्या बात होगी?
ये सुबह होगी न होगी?
आ अभी अनुराग कर लें।
आ परस्पर अंक भर लें।

2. कल से तुम गुलाबी हो,
किस पर जाल फैलाया।
किसके तृषित अधरों का,
जागा भाग्य ऐ! बाले।

3. माना झूठ है मेरी,
कविता भी कहानी भी।
ये ही तो बहाना था,
मेरे पास तुम आये।

4. बाहर ठंड है बेशक,
रिश्ते गर्म हैं लेकिन।
आओ पास बैठें तो,
पिघले बर्फ थोड़ी सी।

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गुरुवार, 13 दिसंबर 2018

पन्द्रह लाख


मन्दिर बन पाया नहीं, मिले न पन्द्रह लाख।
मतदाता ने भी रखा, बीजेपी को ताख।।
नए नोट की चमक सा, फीका हुआ प्रभाव।
मतदाता सहलायेगा, कब तक अपने घाव।।
भूल गए सब वायदे, सबका किया विकास।
सबसे अधिक सवर्ण का, शासन में उपहास।।

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