लो बीता हिन्दी दिवस, खत्म हो गया स्वांग।
किचन और ऑफिस चढ़ी, अंग्रेजी की भाँग।
अंग्रेजी की भाँग, गटककर मुर्गा सोता।
अंग्रेजी रँग बाल, रँगे बाबा का पोता।
चढ़ छज्जे पर मेम, बन गयी देशी सीता।
हिन्दी हित हर हाथ, दिख रहा एक पलीता।।
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