हास्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
हास्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 31 दिसंबर 2022

बेरहमी

दिसम्बर २००६

वह बहुत खूबसूरत और दिल की सच्ची है।
जैसे तुरंत पैदा हुई सूअर की बच्ची है।
रात भर करवटें बदलीं और बहुत तड़पा किये।
हाय कितनी बेरहमी से काट गया बिच्छी है।
जाने कैसी हड़बड़ी थी गिर गया मैं खाट से,
घुस गयी थी एक चुहिया इस कदर रजाई में।
गुदगुदी का लुत्फ पूरा हाय उस दिन गया,
पी गया जिन्दा जुएं को भूल से दवाई में।
मैंने समझा चल गयी था आँख में भुनका पड़ा,
इस समझ का खमियाजा भी बहुत महँगा पड़ा।
चाँद पर जूते मिले बिखरे हुए दो चार सेट,
राज कैसा चाँद पर जो दाग ये गहरा पड़ा।
बन्द सारी गुफ्तगू है आजकल आबोहवा से,
बेवफा थी रूह भी क्या साँस को रुकना पड़ा।

कृपया पोस्ट पर कमेन्ट करके अवश्य प्रोत्साहित करें|

गुरुवार, 3 नवंबर 2022

ओ कुड़ी तू मुझसे पट

आपने हाँक लगाकर सामान बेचने वालों को देखा ही होगा। क्या कलात्मक ढंग से आवाज लगाकर अपने ग्राहक को केन्द्र में रखते हैं कि बस ग्राहक मना नहीं कर पाता। दूसरी ओर प्रेमी जन होते हैं बड़ा भावविभोर होकर प्रणय निवेदन करते हैं बेचारे पिटते पिटते बच जाते हैं, कभी पिट जाते हैं और कभी उनके वो पट जाते हैं। मेरा क्या होगा राम जाने? मैंने तो पहले वाली युक्ति ही उचित समझी। आनन्द के लिए मैंने लिखा आनन्द के लिए आप पढ़ें। मस्तिष्क को थोड़ी देर के लिए छुट्टी दें। 

आजूबाजू वाले छड, 
ओ! कुड़ी तू मुझसे पट!
नहीं सोच मैं पका हुआ हूँ,
नर्म डाल पर टँगा हुआ हूँ,
अब तक टपका नहीं अगर मैं, 
तेरी खातिर रुका हुआ हूँ।
एक बार तो मुझको चख,
मैं झट से जाऊँगा कट।।
ओ! कुड़ी तू मुझसे पट!
कुछ न करे तो यहीं खड़ी रह,
फोटो जैसे फ्रेम जड़ी रह,
आँखों की राहों से घुस जा,
दिल के बेड पर सदा पड़ी रह।
मैं भी बिल्कुल नहीं हिलूँगा,
रसिक प्रिये! मैं भी उद्भट।।
ओ ! कुड़ी तू मुझसे पट!
शरद-ग्रीष्म की चिंत नहीं कर,
केवल अपना चित्त सही कर,
चलो प्रेम का वित्त बढ़ायें,
ना ना कर मति नहीं दही कर।
खा लेना तू चाउमीन भी,
अभी न भूखी जा मरघट।
ओ ! कुड़ी तू मुझसे पट!

बुधवार, 27 अप्रैल 2022

रोटी और अचार से

हमने सोना शुरू कर दिया, छत पर इस इतवार से।
चार पड़ोसी भड़क गए हैं, अपने इस व्यवहार से।।1।।
अभी दूर की नजर हमारी इतनी ज्यादा तेज है।
मीलों भर से जान सकें हम काँपे कौन बुखार से।।2।।
बाजारों से बच कर रहना, महाजनों के जाल ये।
बड़े बड़ों की हस्ती मिट गई, उबरे नहीं उधार से।।3।।
जो गुलाब से दमक रहे हैं, क्या बकरे सब स्वस्थ हैं?
इनमें से बहुतेरे रोगी, हैं डॉक्टर की मार से।।4।।
लाउडस्पीकर जब से उतरा, मन्दिर की प्राचीर से,
अपना झगड़ा सब सुनते हैं, टिकट लिए तैयार से।।5।।
इतना मीठा नहीं खिलाओ, मित्र पड़ूँ बीमार मैं।
मन की तृप्ति 'विमल' को मिलती, रोटी और अचार से।।6।।

बुधवार, 22 मई 2019

पपीता हुआ हूँ

बिना शायरी के ही जीता हुआ हूँ।
अभी शेर था, अब से चीता हुआ हूँ।
किसी से नहीं जीत की चाह बाकी,
फलों के जगत में पपीता हुआ हूँ।।

कृपया पोस्ट पर कमेन्ट करके अवश्य प्रोत्साहित करें|

शुक्रवार, 8 मार्च 2019

सत्ता का प्रभाव

कंटकों से भरे हुए, पथ में जो जाना पड़े,
पैर में पड़े जूतों से, प्यार हो ही जाता है।
जहाँ मारपीट की हों थोड़ी भी सम्भावनाएं,
हाथ में लगे तो हथियार हो ही जाता है।
पत्थरों में नाम जब खोदा नहीं जाता बन्धु,
नेताजी का खून खौल, क्षार हो ही जाता है।
सत्ता के जूते पर हो पॉलिश अहंकार की,
चोरों व उचक्कों में, रार हो ही जाता है।।

कृपया पोस्ट पर कमेन्ट करके अवश्य प्रोत्साहित करें|

सोमवार, 29 अक्टूबर 2018

मीठा खट्टा

एक मच्छर दूसरा तिलचट्टा है,
एक सिल है तो दूसरा बट्टा है,
थोड़ी खटर पटर ही सही,
प्रेम में लुनाई न सही
थोड़ा मीठा है थोड़ा खट्टा है।।1।।

तुम अनार का जूस पीती रहो,
और हथिनी सा जीती रहो,
चिन्ता ये नहीं कि तू ज्यादा जी जायेगी,
चिन्ता ये है उठायी कैसे जायेगी।।2।।

कृपया पोस्ट पर कमेन्ट करके अवश्य प्रोत्साहित करें|

हमारीवाणी

www.hamarivani.com
www.blogvarta.com