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बुधवार, 25 अक्टूबर 2017

स्वयं की झनकार के प्रति



20/10/2017
जन्म लेना एक वचन था जो किया संसार के प्रति।
माँ, पिता, गुरु, देवगण द्वारा किये उपकार के प्रति।
और हम विस्मृत किये निज स्वार्थ में ही जी रहे हैं,
दण्ड क्या देगा विधाता हो रहे अपकार के प्रति।
त्यागकर कर्त्तव्य का पथ पग कुपथ में दे दिये,
किन्तु अति जागृत हुए हैं स्वयं के अधिकार के प्रति।
हम सितारों में लगे हैं खोजने अपनी जगह को,
किन्तु अपनी दृष्टि की गति हो गयी जलधार के प्रति।
शीश से ऊपर उठाकर हाथ दीपक ले खड़े,
गालियाँ बकने लगे हैं व्यर्थ ही अँधियार के प्रति।
हाट की हर चिल्लपों पर ध्यान इतना दे रहे,
हम अजाने हो गये हैं स्वयं की झनकार के प्रति।
जब हमें निज के लिए कुछ गीत गाने चाहिए,
मुंह उठाये रागिनी अल्ला रहे दरबार के प्रति।

शनिवार, 5 जुलाई 2014

फेरीवाले

2/4/1993

6

फेरीवाले, फेरीवाले, फेरीवाले|

फेरीवाले, फेरीवाले, फेरीवाले|

नंगे पांवों दौड़े आते,

सरदी गरमी या बरसातें,

नये शहर में, नये गाँव में,

बीच धूप में, याकि छाँव में,

बिखराकर अपनी दुकान को,

किये उपेक्षित निज थकान को,

द्वारे द्वारे टेर लगाते,

स्वयं उठा जन कष्ट बचाते|

चिकनी चुपड़ी बातें करते फेरीवाले|

फेरीवाले, फेरीवाले, फेरीवाले|

फेरीवाले, फेरीवाले, फेरीवाले|

फल सब्जी या चूरन चटनी,

सज्जा साधन ले लो सजनी,

कपड़े बर्तन मिर्च मशाला,

बेच्र रहे हैं गड़बड़झाला,

बच्चे खायें चाट पकौड़ी,

बहना आयें दौड़ी दौड़ी,

टूटे फूटे बदलो आकर,

नये नये सामान सजाकर,

चिल्लाते हैं द्वारे द्वारे फेरीवाले|

फेरीवाले, फेरीवाले, फेरीवाले|

फेरीवाले, फेरीवाले, फेरीवाले|

जहाँ खड़े हैं वहीं हाट है

पहचाना हर एक बाट है|

लाल हुआ मुँह चुए पसीना,

धकधक धकधक चलता सीना,

किन्तु नहीं है निकट विकलता,

पूँजी है व्यवहार कुशलता,

थके कदम पर तेज चाल है|

श्रम की रोटी का कमाल है|

जीवन का अहसास कराते फेरीवाले|

फेरीवाले, फेरीवाले, फेरीवाले|

फेरीवाले, फेरीवाले, फेरीवाले|

हमारीवाणी

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