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शुक्रवार, 3 जून 2022

खुद से शादी

स्वयं से प्रेम तो बहुत से मनुष्य करते हैं, मैं भी करता हूँ। किन्तु विवाह तो किसी अन्य से ही किया है। विवाह का उद्देश्य प्रेम होता है पहली बार पता चला। हमारी सनातन परंपरा में तो दो अनजाने लोग विवाह करते रहे हैं बच्चे पैदा करते रहे हैं परिवार का विस्तार करते रहे हैं। उनमें कभी प्रेम हुआ तो ठीक नहीं हुआ तो ठीक। मेरे अपने विवाह को 26 वर्ष हो गए। मैं अपनी पत्नी से प्रेम करता हूँ निश्चय करके नहीं कह सकता। पत्नी को छोड़िये मेरे जानने वालों को कोई यह बता दे कि विमल कुमार शुक्ल को किसी से प्रेम भी है तो विश्वास नहीं करेंगे। 
विवाह का कारण प्रेम है तो यह भी आवश्यक नहीं। हमारे समाज में तमाम लोग हैं परस्पर प्रेम करके जीवन बिता देंगे पर विवाह नहीं करेंगे। विवाह किसी और से प्रेम किसी और से यह भी चलता है। 
फिल्म वालों ने लैला मजनूँ और शीरी फरहाद से टपोरियों को दिमाग में इस तरह भर दिया है कि अब प्रेम पहले फिर शादी और कभी कभी शादी से पहले ही ब्रेकअप। 
मैं कुछ लोगों को जानता हूँ जो विवाह करके अपना घर तो बसा  नहीं पाये हाँ प्रेम के चक्कर में दूसरे का तोड़ जरूर दिया। ऐसे लोग भी समाज में हैं विवाह नहीं करेंगे लेकिन हर फूल का आस्वाद ग्रहण करने के चक्कर में रहेंगे। एक उम्र पर जब स्थायित्व चाहेंगे तो फूलों के द्वारा स्वतः फेंक दिए जायेंगे। 
खैर आप विवाह करें न करें। आपकी इच्छा। संविधान अनुमति देता है। किन्तु बायोलॉजी का क्या? बायोलॉजी सभी सजीवों में (पेड़ पौधों सहित) अपनी सृष्टि विस्तार के लिए लैंगिक व अलैंगिक दो प्रकार के साधनों को इंगित करती है। लैंगिक व अलैंगिक जनन करनेवाले प्राणियों की पृथक पृथक विशेषताएं होती हैं। स्पष्टतः मनुष्य लैंगिक प्राणी है। जैसे ही बालक बालिकाएं किशोरावस्था में पहुँचते हैं विपरीत लिंगियों में आकर्षण बढ़ जाता है। इसमें कुछ भी अस्वाभाविक नहीं है। हाँ हमारी सामाजिक परम्पराओं व मान्यताओं के कारण हम लड़के लड़कियों के स्वतंत्र मेलजोल को अनैतिक मानते रहे हैं। 
इस अनैतिकता को नैतिकता का स्वरूप प्रदान करने के लिए ही विवाह को स्वीकारा गया है। दूसरे आयुर्वेद के जानने वाले जानते है कि शरीर के चौदह वेग भूख, प्यास, खाँसी, श्वास, जम्भाई आदि में एक वेग यौनेच्छा का भी है। इन सारे वेगों को रोकने से शरीर विकारग्रस्त हो जाता है। विवाह मनुष्य की यौन इच्छाओं की तृप्ति का साधन भी है। भौतिकी में भी न तो धनावेश-धनावेश आकर्षित होते हैं और न ऋणावेश-ऋणावेश। ये सदैव प्रतिकर्षित ही करते हैं। कार्यफलन के लिए धनावेश व ऋणावेश का संगम आवश्यक है। इसी प्रकार चुम्बक में ध्रुवों का व्यवहार भी होता है। उत्तर-उत्तर व दक्षिण-दक्षिण ध्रुव कभी नहीं मिलते। एकल ध्रुवीय चुम्बक का तो अस्तित्व ही नहीं होता। 
ठीक इसी प्रकार आप सनकी या महामानव हो सकते हैं किन्तु परिवार नहीं हो सकते। परिवार के लिए धनावेश-ऋणावेश, उत्तर ध्रुव-दक्षिण ध्रुव जैसे ही स्त्री-पुरूष तथा प्रेम और घृणा दोनों की ही आवश्यकता होती है। 
यह सम्भव है कि आपको अपने मनोनुकूल साथी मिलने में समय लगे इसके लिए ईश्वर से प्रार्थना करें किन्तु मिलेगा अवश्य। न मिले फिर दूसरे को अपने मनोनुकूल बना लें। सबसे सरल है स्वयं दूसरे के मनोनुकूल बन जाएं। प्रेमी का यह भी एक स्वरूप होता है और सर्वोत्तम स्वरूप है कि हम वह बनें जो हमारा प्रेमी/प्रेमिका चाहता है/चाहती है। मार्ग अनन्त हैं हठ छोड़ कर देखें।
संक्षेपतः विवाह एक आवश्यक व नैतिक शर्त है, आप करें न करें आपकी मर्जी, किन्तु उपयुक्त अवस्था प्राप्त कर, पूर्ण स्वस्थ होकर भी विवाह नहीं करते तो आप मनोविकारी हैं हाँ सन्यासी हो जाएं अलग बात है। तो मेरा सुझाव है यदि आपकी उम्र हो गई है नैसर्गिकता का आनन्द लें विवाह करें और वैवाहिक धर्म का पालन करें। जिस प्रकार मार्ग सदैव समतल नहीं होता उसी प्रकार जीवन भी समतल नहीं होता। पर्वतारोहण से घबरायें नहीं।

शनिवार, 26 सितंबर 2020

प्रतिबन्ध या नियमन

प्रेम कोई पाप नहीं तो क्यों अब तक न पापा जानते हैं और न मम्मी| चलो अपने मम्मी-पापा को छोड़ो| क्या कभी अपने प्रेमी या प्रेमिका के मम्मी-पापा को बताया कि तुम दोनों एक दूसरे से प्रेम करने का पुण्य कमा रहे हो| अगर नहीं, तो यह प्रेम यथार्थ में पाप है? क्योंकि पाप और पुण्य की परिभाषा मात्र इतनी है कि कि किसी कर्म की सामाजिक स्वीकृति का स्तर क्या है? अन्यथा न तो कुछ पाप और न कुछ पुण्य|

क्या कभी सोचा है कि प्रेम की परिणिति क्या है? यदि इस प्रेम की परिणिति विवाह है तो माँ-बाप को सूचित कर उनकी स्वीकृति लो| चलो नहीं बताया, नहीं ली स्वीकृति, तुम हो गये बड़े, तुम्हें है अपने जीवन- साथी के चयन का अधिकार तो कम से कम यह तो जानो कि वह किस परिवार, किस शहर या किस गली-मुहल्ले से है| कभी अपने प्रेमी-प्रेमिका के घर भी हो आओ बिना बताये| पता तो चले वह पूर्व में विवाहित तो नहीं या जो खुद को राजकुमार/ राजकुमारी बता रहा/रही है वह किसी अपराधी गैंग के सरदार तो नहीं| विवाह के सफल संचालन के लिए इसका ज्ञान अतिआवश्यक है|

यदि इस प्रेम की परिणिति विवाह नहीं तो सिर्फ मौज-मस्ती के लिए सम्बन्ध बना रहे हो तो किसी भी प्रकार की हानि उठाने पर एक दूसरे पर आरोप लगाने का कोई तुक नहीं| जैसा किया वैसा भरो, वरना अपने माँ- बाप पर भी विश्वास करो|

आजकल प्रायः एक शब्द प्रचलन में है ‘लव जेहाद| लव समझ में आया और जेहाद भी| लेकिन लव जेहाद बिल्कुल समझ में नहीं आया| आखिर आप इतने भोले क्यों हैं कि आपकी बेटी किसी का बिस्तर गर्म कर रही है और आप उसके बारे में जानते नहीं| कुछ माँ- बाप कह सकते हैं कि बेटे- बेटी पढ़ाई-लिखाई व काम- धंधे के सिलसिले में बाहर रहते हैं तो हर बात पता नहीं चलती| सच है साहब लेकिन यह क्या बात हुई कि आपके सामने आपकी बेटी किसी से हँस-बोल रही वह आपके परिवार का नहीं है और सिर्फ यह मान कर संतोष कर रहे हैं कि आपकी बेटी का दोस्त है तो सावधान होइए, बाद में आपको कहने का कोई अधिकार नहीं आपको पता नहीं चला| अरे बन्धु हम नौकर रखते हैं तो उसके बारे में जाँच करते हैं आप किसी को जीवन का हिस्सा बना रहे हैं और आपको पता नहीं? तो वैरी बैड|

एक अन्य शब्द आजादी भी बहुत प्रचलन में है विशेषकर महिलाओं की आजादी| आरोप लगता है पुरुषों पर कि पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को खुलकर अपनी बात कहने, हँसने-बोलने व व्यवसाय आदि की  आजादी नहीं है| कभी-कभी आजादी की यह भावना इतनी प्रबल हो जाती है कि अरस्तू मूर्ख प्रतीत होता है जिसने कहा था, “मनुष्य स्वतन्त्र जन्मता है और स्वतन्त्र मरता है किन्तु वह सर्वत्र बेड़ियों में जकड़ा हुआ है|” क्या स्त्री क्या पुरुष बंधन में कौन नहीं है? अगर आप एक परिवार हैं, तो यह बंधन अनिवार्य हैं और इन्हें सबको मानना चाहिए|

नई पीढ़ी के बच्चे प्रायः उच्छ्रंखल हो गये हैं और माँ-बाप आधुनिकता के नाम पर उनकी उच्छ्रन्खलता को सहन कर रहे हैं| यह स्थिति परिवर्तित होनी चाहिए| अन्यथा आप लव जेहाद क्या किसी भी प्रकार के धोखों से बालकों को रोक नहीं पायेंगे|

अभिभावकों का यह उत्तरदायित्व है कि वे उन सबका बायोडाटा अवश्य रखें जो उनके सम्पर्क में हैं| एक पढ़ी लिखी लड़की जब यह कहती है किसी लड़के ने अपना परिचय छिपाकर साल दो साल उसका शारीरिक शोषण किया है तो उससे अधिक मूर्खतापूर्ण कुछ हो नहीं सकता| जब हम किसी के पास अपनी कोई धरोहर रखते हैं तो भलीभाँति पड़ताल कर उसके पास रखते हैं| आपने अपना जीवन ही किसी को सौंप दिया| बिना यह जाने कि सामने वाले का धर्म, जाति और सम्प्रदाय क्या है? चलो सामने वाले पर विश्वास कर लिया धोखा हो गया तो इसमें कौन सी महानता है कि आप विवाहपूर्व सम्बन्धों के राजी हो गईं|क्या आपको पता नहीं विवाह जैसी संस्था किसलिए है? स्पष्ट है कि आप आजादी के नाम पर उम्र का भरपूर आनन्द ले रहीं थीं| ऐसा नहीं है कि लडकियाँ ही इस धोखे का शिकार होती हैं लड़के भी फँस जाते हैं| मिस्डकाल, व्हाट्स एप्प और फेसबुक और न जाने क्या क्या| पहले दोस्ती गंठती है फिर एक दिन पहुँचते हैं झोला उठाकर प्रेमिका के घर  तब माँ-बाप को पता चलता है कि साहबजादे का अपहरण हो गया है या फिर पुलिस में जाने की धमकी देकर अच्छी खासी रकम ऐंठ ली जाती है| जब से मी-टू चला है तब से ऐसे मामले कुछ ज्यादा ही प्रकाश में आ रहे हैं|

इस सबमें बच्चों का दोष कम है अभिभावकों का अधिक| उन्होंने बच्चों को इतना लाड़-प्यार करना शुरू कर दिया है कि बच्चे अभिभावकों की उपेक्षा करने लगे हैं| उन्हें लगता है कि अभिभावक के मात्र कर्त्तव्य हैं और अधिकार मात्र उनके| समाज में एक अनुचित धारणा बन गयी है कि बच्चे बड़े हो गये और उनको अपने बारे में निर्णय का अधिकार है? सत्य है उनको अपने बारे में निर्णय का अधिकार है किन्तु तथ्यों और अनुभवों के प्रकाश में और ये तथ्य तथा अनुभव अभिभावकों के पास होते हैं| अन्यथा धोखा होने पर बालक-बालिकाएं तो रोते ही हैं माँ-बाप को भी रोना पड़ता है या कहें कभी कभी केवल माँ-बाप को ही रोना पड़ता है| क्योंकि त्रुटियाँ करने वाला तो स्वयं को मानसिक रूप से परिणाम के लिए प्रशिक्षित कर लेता है|

अपने बालकों के लिए एटीएम न बनें| एटीएम से धन निकासी की कुछ शर्तें होती हैं| वे शर्तें निर्धारित करें और इस स्वतन्त्रता को सीमित करें| अभिभावक होने के नाते आपके पास पर्याप्त अधिकार हैं और उन अधिकारों को पहचानें और प्रयोग करें|

ऋषि वेद व्यास ने एक बार ऋषि जैमिनी से कहा था कि स्त्री और पुरुष के मध्य मात्र एक सम्बन्ध होता है कि वे स्त्री और पुरुष हैं| ऐसे में जो आजकल यह माना जाने लगा है लड़के लडकियाँ मित्रता कर सकते हैं|  यह मित्रता बिल्कुल आग और फूस की मित्रता है| यह नितांत प्रकृति के नियमों के विपरीत है कि एक युवा और युवती एकान्त में मिलें और वे मित्र ही रहें| बॉय फ्रेंड व गर्ल फ्रेंड जैसे शब्द फिल्म व टीवी सीरिअल में ही अच्छे लगते हैं| व्यवहारिक जीवन में ये शब्द अनौचित्य पूर्ण हैं| फ्रेंडशिप प्यार में और प्यार विवाह में बदला तो ठीक नहीं तो व्यभिचार में बदल ही जाता है| तो फिर क्यों चिल्लाता है? बेटी हों या बेटे उन्हें मर्यादा सिखाएं और समझाएं| मर्यादा स्वतन्त्रता का अतिक्रमण नहीं है स्वतन्त्रता का नियमन है| उन्हें समझाएं कि नदी के तट नदी के बहने पर प्रतिबन्ध नहीं हैं, वे नदी की परिभाषा हैं ये तटबंध टूटेंगे तो जो लोग नदी को पुण्यदायिनी मानकर उसकी पूजा करते हैं वे लोग नदी को कोसेंगे और उससे दूर भागेंगे|

 

 

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