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बुधवार, 14 दिसंबर 2016

स्वप्न

जिन्दगी धूप में नहाते हुए गयी।
रात-दिन स्वेद को बहाते हुए गयी।।
स्वप्न जो आपने दिखाने शुरू किये।
रोशनी थी आँख से छकाते हुए गयी।।

रविवार, 20 नवंबर 2011

मन्जिल


रास्ते बन्द हैं वे सब जिन्हें मन्जिल से मेरी वास्ता।
फिर भी यह गनीमत है कहीं तो मेरी मन्जिल है।
साथ कोई हो न हो जाना तो जरूरी है।
पथ में रोशनी हो या अँधेरा फूल या काँटे।
जानता हूँ तुम सदा ही साथ हो,
कैसा भय कैसी तनहाई, काँटे क्या अन्धेरा क्या?

हमारीवाणी

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