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सोमवार, 8 जनवरी 2018

काँगड़ा



यह स्थल हिमाचल प्रदेश में स्थित है| इसका प्राचीन  नाम त्रिगर्त है| इस पर 1909 में महमूद गजनवी ने आक्रमण किया और उसे अपने अधिकार में लिया| 1360 में यहाँ का शासक रामचन्द्र था जिसने फिरोजशाह तुगलक के सामने आत्मसमर्पण कर दिया| फिरोजशाह तुगलक ने यहाँ के ज्वालामुखी मन्दिर की मूर्तियों को तोड़ दिया और मुख्य मूर्ति को विजय चिन्ह के रूप में मदीना भेज दिया| 1620 में जहांगीर के शासनकाल में शहजादा खुर्रम के नेतृत्व में राजा विक्रमजीत ने इस किले पर घेरा डाला और काँगड़ा मुगल सल्तनत का हिस्सा बना|
 






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शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

जौनपुर



यह नगर उत्तर प्रदेश में गोमती नदी के किनारे स्थित है इसकी स्थापना सुल्तान फिरोजशाह तुगलक ने अपने भाई जूना खां (मुहम्मद बिन तुगलक) की याद में की थी| जब तैमूर ने हिन्दुस्तान पर आक्रमण किया तब उस समय ख्वाजा जहाँ ने दिल्ली से अपना नाता तोड़कर स्वतंत्र जौनपुर राज्य की नींव डाली| उसने मलिक-उस-शर्क की उपाधि धारण की| मलिक सरवर ने यहाँ शर्की वंश की नींव डाली| शर्की वंश का प्रमुख, योग्य व प्रसिद्ध शासक इब्राहिम शर्की था| उसके काल में जौनपुर ने कला एवं साहित्य के क्षेत्र में बहुत उन्नति की अतः इसे ‘शिराजे-हिन्द’ कहा गया| इस युग में वास्तुकला की विशिष्ट शैली विकसित हुई जिसका शानदार नमूना 1408 में बनी ‘अटाला मस्जिद’ व ‘झंझरी मस्जिद’ है| इसे पूर्व का शिराज भी खा जाता है| 



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