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शनिवार, 7 मई 2022

अखबार पढ़ूँ

क्यों प्रतिदिन अखबार पढ़ूँ मैं।
वही खबर हर बार पढ़ूँ मैं।।1।।
रोज कहानी वही पुरानी।
बदल रहे किरदार पढ़ूँ मैं।।2।।
चंदो भागी चंदा लटका।
धर्मों की तकरार पढ़ूँ मैं।।3।।
भारी वाहन टूटी सड़कें,
ट्रैफिक है बेजार पढ़ूँ मैं।।4।।
अस्पताल कानून पुलिस या,
शासन है बीमार पढ़ूँ मैं।।5।।
बैंक घोटाले रिश्वतखोरी,
नर नारी व्यभिचार पढ़ूँ मैं।।6।।
मँहगाई के अट्टहास पर,
अभिजन-अत्याचार पढ़ूँ मैं।।7।।
बिजली, पानी, खाद, गैस पर, 
जब तब हाहाकार पढ़ूँ मैं।।8।।










बुधवार, 23 दिसंबर 2020

ज़हरीली

पानी में दूध मिला, खोये में रवा।
चीनी में रेत मिली, गेहूँ में जवा।
असली की बात गई, नकली का शोर।
औषधि में जहर मिला, जहरीली हवा।।

रविवार, 31 दिसंबर 2017

स्वागत

पुराना वर्षअलविदा कह रहा है, नया वर्ष बस कुछ ही घंटे दूर खड़ा है| 
ऐसे में दो छोटी छोटी रचनायें अपने ब्लॉग पाठकों के लिये|


[1]
चल पड़ा वो छोड़कर मुझको जवानी की तरह,
बिन रुके बहते हुए दरिया के पानी की तरह||
वो समझ आया नहीं इस बार भी जैसे गणित,
मैं लगाता रह गया अनपढ़ अजानी की तरह||
[2]
अब चलो जो आ रहा उस पर भी डालूँ एक नजर,
बज उठे उम्मीद है इस बार तो दिल का बजर||
हाथ फैलाये खड़ा स्वागत में मैं उसके लिये,
छोड़कर जा ही नहीं सकता है वो मेरी डगर||



 



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