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रविवार, 7 जून 2020

25 जगह नौकरी

अनामिका




 कहाँ तो एक अदद नौकरी की तलाश में एड़ियाँ खत्म हो जाती हैं और मिलती नहीं है। इधर तो एक ही आदमी के लिए बाढ़ आ गयी। अगर फीडिंग न होती तो फर्जी वाड़ा पकड़ में नहीं आता वाह। मेरा प्रश्न यह है कि क्या वेतन जारी करने के लिए ड्यूटी के दिनों या समय का कोई मानक नहीं है, या आँख मीचकर भुगतान हो जाता है। दूसरे क्या कोई अकेला व्यक्ति इतना सक्षम हो सकता है कि 25 स्थानों पर अपनी सेवाएं प्रदान करे। यदि एक व्यक्ति एक दिन में एक जगह अपनी ड्यूटी लगाए और दूसरे दिन दूसरी जगह तो भी वह माह में एक बार भी अपने कार्य स्थल पर नहीं पहुंचेगा क्योंकि छुट्टियाँ भी होती हैं। जाहिर है दाल कहीं ज्यादा काली है जितनी दिखाई देती है और पूरा विभाग इसके लिए दोषी है। मेरा हृदय मानता नहीं था कि कैसे श्री कृष्ण एक होते हुए भी अपनी हर रानी के पास बने रहते थे या फिर कैसे बालि जिस द्वार से निकलते थे उसी पर भगवान उसे विराजमान मिलते थे। अनामिका शुक्ला के इस प्रकरण से विश्वास हो गया।
धुंधली तस्वीर ही नहीं है बहुत कुछ धुंधला है सिर्फ वेतन का मसला नहीं है, इस प्रकरण में 1 को छोड़कर शेष 24 का रोजगार भी छीना गया उसकी भरपाई कौन किससे करायेगा।
समाचार कहता है कि अनामिका ने शिक्षा विभाग को धोखा दिया मैं कहता हूँ कि शिक्षा विभाग ने पूरे देश को धोखा दिया। सच तो यह है तमाम अध्यापक अध्यापिकाएं स्कूल गए बिना ही वेतन आहरित कर लेते हैं और इसे सब जानते रहते हैं। एक महिला शिक्षा मित्र को मैं व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ जिनके पति nprc के पद पर हैं JHS के प्रधानाचार्य और पत्नी शिक्षा मित्र हैं कभी स्कूल नहीं गयीं। मुझसे नाम मत पूछना मैं बहुत छोटा आदमी हूँ, बड़े बड़े मुँह नहीं खोलते जबकि उन्हें मुँह खोलने का वेतन मिलता है।



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बुधवार, 29 मई 2019

दिल से दिल

दिल से दिल की बात करी, और  चल दिये।
मन में न कोई प्रश्न था, पर उसने हल दिये।।1।।
चढ़कर चिराग हुस्न का रक्खा मुंडेर पर,
जालिम को खबर ना हुई, कैसे कतल किये।।2।।
तुम भी तो एक रोज गए थे उसी डगर,
पत्थर तुम्हें कहा क्या, तुम तो पिघल लिये।।3।।
सब कुछ बजार में मुझे मन का मिला नहीं,
जिन्दा रहा हूँ इसलिये अबतक गरल पिये।।4।।
माना कि दूर लगती है सूरज की रोशनी,
पर ज्येष्ठ का महीना, तन मन विकल किये।।5।।
यह प्रेम की कमाई कोई नौकरी नहीं है,
अब तक वसन सिये जो उज्ज्वल 'विमल' सिये।।6।।


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