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मंगलवार, 30 जनवरी 2018

बारात

जब कभी भी इस तरफ बारात आती है,
तब नजर के सामने इक रात आती है,
बस जरा से फासले पर कैद बाहों में,
धड़कनों पर धड़कनों की याद आती है|





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शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2017

दुनिया

नजर.के सहारे चला जा रहा हूँ।
कोई बता दे कहाँ जा रहा हूँ।
दुनिया अजब सा तिलिस्मी सफर है,
जहाँ जा रहा हूँ वहीं आ रहा हूँ।

हमारीवाणी

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