दोहा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दोहा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 22 मार्च 2025

सोमवार, 1 फ़रवरी 2021

दोहा-वार्ता

बड़े बड़ेन के संग मा, कबहु न घूमन जाय।
वह तौ खइहैं कोरमा, तुमका सूखी चाय।। (नीतीश नयन , हरदोई)
मिलिहै तुमका कोरमा, रहउ ढंग से संग।
टाँग बड़ेन की खींचि के, सदा राखिये तंग।। (विमल शुक्ल, हरदोई)
टांग बड़े कर खीचिहौ तो अपुनौ होइहौ तंग, 
बहुत दिनन ई ना बचे होइ जाये एक दिन जंग। (श्रद्धानन्द द्विवेदी, अमेठी)
तबलमंजनी ना करैं,ना हम मांगैं भीख ।
दादा हमसे दूर तुम,राखौ अपनी सीख।। (नीतीश नयन, हरदोई)
तबलमंजनी ना करउ, ना तुम मांगउ भीख।
इनका काटउ यहि तरह, जैसे सिर की लीख।। (विमल शुक्ल, हरदोई)
बड़े जो राखैं दाबि के, करैं न लघु की चिन्त।
हुईहै जंग जरूर तब, फल हुइहैं अनमन्त।। (विमल शुक्ल, हरदोई)

बुधवार, 6 मई 2020

मदिरा

इन्हें पियक्कड़ मत कहो, बड़ी आय का स्रोत।
मदिरा-सागर में बहे, अर्थशास्त्र का पोत।।1।।
चड्ढी फटी दिखाइ कर, मत करिये उपहास।
उतर कण्ठ से माधवी, हर लेती सब त्रास।।2।।
हमने चख पाई नहीं, क्या है इनका दोष।
मदिरा के बूते भरे, बड़े-बड़ों के कोष।।3।।
मदिरा के कारण विपुल, रचा गया साहित्य।
ग़ालिब सा उर्दू जगत, में चमका आदित्य।।4।।
मधुशाला की वजह से, बच्चन हुए प्रसिद्ध।
कविता से पैसा बने, सिखा गए यह सिद्ध।।5।।


हमारीवाणी

www.hamarivani.com
www.blogvarta.com