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सोमवार, 27 जनवरी 2025

एक दिन तय है

पत्ता पत्ता बूटा बूटा झड़ जायेगा एक दिन तय है।
नीरस डाल छोड़ कर पक्षी उड़ जायेगा एक दिन तय है।।
सत्यम् शिवम् सुन्दरम् जप जप, काया माया बसी रही मन।
धर्म-कर्म का मधुर फलाफल सड़ जायेगा एक दिन तय है।।
अपने और पराए गिन गिन, मन को मथते रहते हैं हम।
छल प्रपंच का हर मंदराचल, अड़ जायेगा एक दिन तय है।।
सबको विन्डो सीट चाहिये, सबके अपने-अपने कारण,
लड़ते लड़ते चैन हृदय में, पड़ जायेगा एक दिन तय है।।
चिन्तन मेरा बिल्कुल पिछड़ा, जैसे दादा जी का बक्सा।
अगड़ी सोचों की नजरों में, गड़ जायेगा एक दिन तय है।।

शनिवार, 2 मार्च 2024

मन की कर ले

कदरदान तो आयेंगे ही बाकी को फुर्सत न मिलेगी।
जहॉं जमेंगे पीने वाले साकी को फुर्सत न मिलेगी।।
तेरे हित में ये अच्छा है मन की कर ले इस महफिल में,
ओ रक्कासा! यहॉं से जाकर अन्य कहीं इज्जत न मिलेगी।।
नीचे गिरना जल छोंड़े तो प्यासे सब मर जायेंगे,
आग अगर नीचे गिर जाये धरती पर जन्नत न मिलेगी।
मेरी पुस्तक के ग्राहक हैं चूहे, दीमक, चूरन वाले,
मुझे पता है छपवा भी दूॅं कविता की कीमत न मिलेगी।
जिससे जो भी मिली नसीहत सबकी सब मेमोरी में,
जो भी चाहे सब ले जाये बार बार मोहलत न मिलेगी।

हमारीवाणी

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