मंगलवार, 30 मार्च 2021

चमकती चीजें

बहुत दिनों से मन में द्वंद्व था कि लिखूँ न लिखूँ। आखिर लिखने की भावना ने विजय प्राप्त की और लिखने बैठ गया। हम भारतीयों की प्राचीन काल से रोटी, कपड़ा और मकान के अतिरिक्त एक अन्य आवश्यकता रही है "आभूषण"। यद्यपि तमाम पुरुषों का आकर्षण भी आभूषणों के प्रति होता है किन्तु महिलाओं का कहना ही क्या? शायद ही कोई स्त्री होगी जो जेवर कपड़ों से तृप्त हो जाए। यह अलग बात है पति उनकी आकांक्षा की पूर्ति करता है कि नहीं।
समाज में सुन्दर, श्रेष्ठ व धनी दिखने की चाहत, धन को बहुमूल्य धातुओं के रूप में संचित करने की चाहत, अपनी बचत को गाढ़े समय के लिए बचाकर रखने की इच्छा और शादी-विवाह जैसे अवसरों पर लेन-देन व पहनने-पहनाने के लिए जेवरों को खरीद बेचा जाता रहा है। भारतीय समाज का एक बड़ा वर्ग सदियों से इन्हीं आभूषणों की सहायता से गिरवीं-गाँठ रखकर अपनी अर्थ-व्यवस्था को सँभालता रहा है।
दूसरी ओर इन्हीं के व्यापार से एक बड़ा वर्ग अपनी आजीविका पहले भी चलाता रहा है और अब भी चला रहा है।
भारत में सोने चाँदी की एक बहुत बड़ी बाजार है जो कि संसार के आभूषण बाजार में शायद सबसे बड़ी है। लेकिन क्या आपको पता है कि जितना बड़ा बाजार असली जेवरों का है उससे कहीं बड़ा बाजार नकली जेवरों का भी। इन नकली जेवरों में मिलावटी धातुओं से लेकर सस्ती धातुओं के फैंसी आभूषण तक शामिल हैं। इसके अलावा क्या आपने सोचा है कि जिस आभूषण को आप असली समझते  हैं हो सकता है कि पीढ़ियों तक आपको पता ही न चले वह असली है कि नकली। ऐसे आभूषणों का भी बड़ा बाजार है कि स्वर्णकार उन्हें सौगन्ध खा खाकर उत्तम किस्म का बता बताकर बेचता है और उन्हें बेचने जायेंगे तो दूसरा स्वर्णकार उसका उचित मूल्य नहीं लगाएगा और उन्हें खोटयुक्त बतायेगा। जब आप पहले वाले आभूषण विक्रेता के पास जायेंगे तो वह पुनः अपने माल की गुणवत्ता को लेकर सौगन्ध उठायेगा और वापस खरीदी करेगा किन्तु नकद मुद्रा शायद ही देगा क्योंकि उसकी नीयत में वाकई खोट है।
इसके अतिरिक्त सोने का जो रेट आपको बताया जाता है असली सोने का होता है और जेवर टाँका युक्त अर्थात अशुद्ध धातुयुक्त। फिर भी आपको आभूषण की बनवाई के नाम पर अतिरिक्त ठग लिया जाता है। यही हाल चाँदी के जेवरों का भी । आजकल तो तनिष्क आदि के आभूषण आ रहे हैं जिन्हें उत्तम क्वालिटी का बताया जाता है फिर हॉलमार्क युक्त आभूषण आ रहे हैं जिनकी असलियत असन्दिग्ध मानी जाती है वरना मैं आपको अपना एक अनुभव बताऊँ हरदोई बड़ा चौराहा स्थित लाला प्यारेलाल सर्राफ की दूकान है जहाँ 1996 में मेरी माँ ने हथफूल खरीदे चाँदी के और फिर उन्हीं की दूकान पर उन्हीं की दूकान के कारीगर से उनपर सोने की कलई करवाई। मैं उस समय उनके साथ में ही था। उन हथफूलों को चढ़ावे पर भेजकर हम चार भाइयों के विवाह हो गए। 2019 में 23 साल बाद मेरी माँ को उन हथफूलों को बेचने का इरादा हुआ तो जब उसे अन्य स्वर्णकार के यहाँ बेचने का यत्न किया तो पता चला कि वे बेहद सस्ती धातु गिलट के बने हैं। दुकानदार के यहाँ शिकायत आदि करने के लिए इतने समय तक रसीद कौन सँभालता है। मैंने या मेरी माँ ने भी नहीं सँभाली। किन्तु एक चीज समझ में आई कि चमकती चीजें प्रायः छल करती हैं और परखेंगे तो उनकी चमक चली जाती है। कल्पना करें यदि उन हथफूलों को हम चार भाइयों में से किसी एक ने भी अपने पास रखने का फैसला किया होता तो आज भी हम उन्हें चाँदी का ही समझ रहे होते।
तो भइया आभूषण खरीदें शौक से किन्तु जानबूझकर। अन्यथा धनी होने का भ्रम पालने से कोई लाभ नहीं, जब समय आएगा और असलियत पता चलेगी तब तक बहुत देर हो जाएगी। बेहतर हो तो धन का सदुपयोग करें और शरीर पर पत्थर लादने का मोह छोड़ ही दें।
हस्तस्य भूषणं दानं सत्यं कंठस्य भूषणं।
श्रोत्रस्य भूषणं शास्त्रं भूषणैः किंप्रयोजनम्।।

शुक्रवार, 26 मार्च 2021

कोरोना का प्रभाव

समस्त प्राइवेट विद्यालय संचालकों, प्राइवेट अध्यापकों व समस्त अभिभावकों जिनके आश्रितों की शिक्षा इस कोरोना काल में प्रभावित हुई है, उनसे इस क्षुब्ध, व्यथित व करुण हृदय के ब्राह्मण की करबद्ध प्रार्थना है कि कुछ प्रश्नों पर विचार करें और तानाशाही व विवेकहीनता को समय रहते लोकतांत्रिक ढँग से जवाब दें।
1- केवल 40 कोरोना मरीज और सम्पूर्ण देश में लॉक डाउन।
2 - लॉक डाउन लगा रहा और मरीज बढ़ते रहे।
3 - कोरोना से मरने वालों की संख्या क्या किसी एक अन्य वजह से मरने वाले मरीजों से ज्यादा थी क्या?
4 - जब लॉक डाउन खुला तो सबसे पहले शराब ठेके खुले, कितना जरूरी था इनका खुलना?
5 - धीरे धीरे सब खुला नहीं खुले तो सिर्फ स्कूल। क्या बन्द रहे स्कूल कोरोना के फैलाव के लिए उत्तरदायी हैं?
6 - पुनः स्कूल बंद करने से या किसी प्रकार का लॉक डाउन लगाने से कोरोना पहले घटा या अब घटेगा?
7 - स्कूलों के बन्द रहने से आपके बच्चों पर क्या असर पड़ा और यदि भविष्य में स्कूल बन्द रहे तो क्या प्रभाव पड़ेगा?
8 - स्कूलों के अलावा क्या - क्या बन्द होगा? 
9 - क्या कोरोना के प्रसार काल में किसी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों में कोई कमी आयी या राजनीतिक गतिविधियों से कोरोना फैलता ही नहीं है?
मित्रों मैं जवाब नहीं दूँगा। जवाब आपके पास है मैं सिर्फ निवेदन कर सकता हूँ आपसे। अब सरकार से नाउम्मीद हूँ इसलिए आपके दरबार में हूँ। बन्धुओं समस्त विद्यालय संचालकों, अध्यापकों व अभिभावकों से मेरा निवेदन है कि यदि 1 अप्रैल को स्कूल बन्द रहे और चुनावी गतिविधियाँ जारी रहें तो निश्चित रूप से यह समझें कि प्रदेश के सत्ताशीन आपके प्रति संवेदनाशून्य हैं और कोरोना के नाम पर गोरखधंधा चला रहे हैं।  इसलिए मेरा करबद्ध निवेदन है कि पंचायत चुनाव में समस्त बीजेपी प्रत्याशियों के बहिष्कार करें भले ही अपना मत कूड़ेदान में डाल दें। शेष आपकी मर्जी लोकतंत्र है सबको अपना निर्णय लेने का अधिकार है। इस पोस्ट को कम से कम मेरी तरह के वे संचालक व अध्यापक अवश्य शेयर करें जिनके पास खोने के लिए अब कुछ भी नहीं बचा है।

मंगलवार, 23 मार्च 2021

फटी हुई जीन्स

फटी हुई जीन्स की आलोचना न करें बन्धु,
हो सके तो सही वेशभूषा को सम्मान दें।
कुतियों के भौंकने पर कान बन्धु देते क्यों,
कोयलों के गुणगान वाला आसमान दें।
कोयले के नाम से काली छवि बने मन,
मन को तो क्षीरसिन्धु का ही ज्ञान-ध्यान दें।
भृष्ट-जन-चिंतन से भृष्टता ही आती तन,
मन में न राम यदि रमा को स्थान दें।।


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सोमवार, 22 मार्च 2021

जाती हैं बाजार

जबसे आयीं मायके, कर नित नव श्रृंगार।
छोट-भैया ले साथ में, जाती हैं बाजार।
जाती हैं बाजार, जहाँ पर राम-पियारे।
लिए रेंट पर रूम, रहें निज गेह बिगारे।
तोड़ रहें सम्बन्ध, एक की खातिर सबसे।
दिखें प्रफुल्लित बन्धु, मायके आयीं जबसे।

हमारीवाणी

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