शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

देवल



यह स्थल आजकल समुद्र में डूब गया है, किन्तु किसी समय यह सिन्धु नदी के मुहाने पर स्थित एक बन्दरगाह था| इसे दीदूल सिंध के नाम से भी जाना जाता है| मोरलैण्ड ने “इंडिया ऐट द डेथ ऑफ़ अकबर” में लिखा है कि मानसून की दृष्टि से इस बन्दरगाह की स्थिति ठीक नहीं थी| 





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कालीकट



यह स्थल केरल के मालाबार तट पर है| 27 मई 1498 को पुर्तगाली नाविक वास्कोडिगामा समुद्री मार्ग से इस स्थान पर पहुँचा| जहाँ हिन्दू शासक जमोरिन ने उसका स्वागत किया| 1790 में यह अंग्रेजों के अधिकार में आया|   




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पैठान



यह स्थल महाराष्ट्र के औरंगाबाद जनपद में गोदावरी नदी के उत्तरी किनारे पर है| प्राचीनकाल में इसे प्रतिष्ठान नाम से जाना जाता था| यह एक पौराणिक नगर है, पुराणों के अनुसार इसकी स्थापना ब्रह्मा ने की थी| सातवाहन काल में यह स्थान ने अधिक प्रसिद्धि पाई| यहाँ से आन्ध्र नरेशों के चलाए गये सिक्के भी प्राप्त हुए हैं| 




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नानाघाट

यह स्थान महाराष्ट्र के पुणे जनपद में है| यहाँ स्थित एक गुफा में सातवाहन नरेश शातकर्णी की नागानिका का एक अभिलेख है| जिससे ज्ञात होता है कि शातकर्णी ने अनेक अश्वमेध व राजसूय यज्ञ किये थे| उसने ब्राह्मणों को विभिन्न प्रकार के दान भी दिए थे| इस अभिलेख द्वितीय शताब्दी में बौद्धधर्म के उत्कर्ष के पश्चात हिन्दू धर्म के फिर से विकास का ब्यौरा भी प्राप्त होता है| इस अभिलेख में शातकर्णी को ‘सिमुक वंश का धन’ कहा गया है| शातकर्णी की मृत्यु के पश्चात नागनिका ने राजकार्य भी संभाला|




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